Saturday, July 26

रीसेंट पोस्ट (पिछले लेख) दिखाएं

ब्लॉग पर आपकी पिछली प्रविष्ठियां वैसे तो आरकाइव में नजर आती हैं, लेकिन कई बार इन्हें देख पाना पाठकों के लिए सुविधाजनक नहीं होता। महीने के बदलते ही आरकाइव में पिछले सभी शीर्षक गायब हो जाते हैं और पाठक उन्हें आसानी से तलाश नहीं कर पाते। क्यों न हर पोस्ट के नीचे पिछली पांच पोस्ट पाठक को दिखा दी जाए। ऐसे में पूरी पोस्ट पढ़ने वाले पाठक आसानी से पिछली पांच प्रविष्ठियों के शीर्षक देखकर उन्हें भी पढ़ सकते हैं। हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर इन्हें पोस्ट के आखिर में पिछले शीर्षक के साथ लगाया गया है। आइए जानते हैं पिछली पांच पोस्ट दिखाने का आसान सा तरीका-

1. ब्लॉगर के डेश बोर्ड पर जाएं और उसके बाद ले-आउट विकल्प चुनें।

2. एड ए पेज एलिमेंट पर क्लिक करें। एक अलग विंडो खुल जाएगी।

3. इस विंडो पर फीड विकल्प को चुनें।



4. फीड यूआरएल बॉक्स में http://www.YOURBLOG.blogspot.com/atom.xml भरें। (यह आपके ब्लॉग की आरएसएस फीड का पता है).YOURBLOG की जगह अपने ब्लॉग का पता बदलना नहीं भूलें।



5. अगली विंडो के टाइटल बार में पिछले लेख या रीसेंट पोस्ट लिखें।

6. दिखाई जाने वाले लेखों की संख्या चुनें।

7. अगर आप लेख के प्रकाशन की तारीख और लेखक का नाम भी प्रकाशित करना चाहते हैं तो संबंधित विकल्प चुनें।

8. सूचनाओं को सेव कर दें।




अब रीसेंट पोस्ट की सूची आपके ब्लॉग पर लग चुकी है। आप लेआउट में जाकर इसे मनचाहे स्थान पर ड्रेग कर सकते हैं।

5 comments:

  1. shukriya lekin in lekho ki adhiktar sankhya 5 hi aa rahi hai .kya inhe ham badha nahi sakte ?

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  2. अनुरागजी, ब्लॉगर के फीड बॉक्स में अधिकतम पांच पोस्ट चुनने की ही सुविधा है।

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  3. Maine aid kiya kintu yeh pahli 5 posts hi dikha raha hai. Kya isse last post se 5 previous posts nahi dikha sakte?

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  4. is post ke liye dhnywaad -main ne pahle isey lagaya tha lekin archive wali post se help le kar archive mein sari posts dikha sakti hun is liye is feed box ko hata diya--Abhishek ji aap bhi bhi aisa hi kar saktey hain.

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  5. प्रिय आशीष जी ,
    मैंने अपने ब्लॉग "पिछले ५ लेख " लगाने का पूरा प्रयास किया लेकिन सिर्फ "पिछला लेख " लिखा हुआ ही दिखा -लेख के टाइटल नहीं ! मैं बहुत हतोत्शाहित सा हो गया हूँ , क्योंकि आपका कोई भी टिप्स हमारे ब्लॉग पर फिट ही नहीं होता है , कृपया मार्गदर्शन करें ! मन बहुत दुखी सा है -- आचार्य रंजन , बेगुसराय , बिहार

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