ब्लॉगर साथियो, अब भी वक्त है सुधर जाओ..

मैं आज सुबह से डरा हुआ हूं। न तो सुबह की चाय ठीक से पी पाया हूं और न ही लंच ही ठीक से कर पाया हूं। काम में भी मन नहीं लग रहा है। ब्लॉग को तो खोलकर भी नहीं देखा है। वजह मत पूछिएगा। वरना आप भी डर जाएंगे। क्या कहा आप नहीं डरेंगे। बड़े बहादुर हैं। क्या आप मेरी तरह ब्लॉग एडिक्शन से पीड़ित नहीं हैं। देखिए चीन में इंटरनेट एडिक्शन किस तरह से छुड़वाया जा रहा है। आज के एक अखबार में छपा यह चित्र मेरे मन में दहशत फैला गया है, क्योंकि इस खास बीमारी के सारे लक्षण हम चिट्ठाकारों में भी है। कहीं यही तरीका हमें भी अपनाना पड़ा तो !!!!!!!!!!!!!

बड़ा देखने के लिए क्लिक करें (साभारः राजस्थान पत्रिका)





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53 comments:

vandana said...

aashish ji
kyun logon ko dara rahe hain.
badon aur bachchon mein kuch to fark hota hi hai soch ka.........bas usi ko use kar lenge.adiction tak baat nhi pahunchne denge.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

चाहे लाख डराओ भइया,
हम भयभीत नही होंगे।
बिना नेट के दुनियादारी,
कविता-गीत नही होंगे।।
इस खास बीमारी के सारे लक्षण हम चिट्ठाकारों में भी है।
आभार!!

ताऊ रामपुरिया said...

भाई अच्छा है कि इस तरह शाक लगवाले वर्ना लोग यहां तो जबरन शाक देने को तैयार बैठे हैं. हिंदी ब्लागिंग् मे शाक की जरुरत शायद ना पडे..खुद आपसी शाक खा खाकर ही ब्लागिंग बंद हो जायेगी.:)

रामराम.

PGDCA University of Allahabad said...

ati sarvatra varjayet.....

kaha bhi gaya hai ki

ati ka bhala na bolana ,
ati ki bhali na choop,
ati ka bhala na barasana,
ati ki bhali na dhoop...

hamare jo blogar sathi 'ATTi' kar dete hai unke liye sachmuch yeh 1 vicharniya prashna hai...

Himanshu Pandey

जितेन्द़ भगत said...

सही कहा आपने, मुझे तो करंट से बड़ा डर लगता है:(

सुशील कुमार छौक्कर said...

अच्छा जी। हमें भी करंट से डर लगता है।

अल्पना वर्मा said...

'अति 'हर चीज़ की बुरी होती है!
लेकिन भारत में ऐसी नौबत आएगी नहीं क्योंकि अमूमन बिजली की लुका छुपी ,ब्रॉड बैंड की खराब सेवा ,बच्चों पर parents का जबरदस्त कण्ट्रोल का
'नेट addiction ' से बचाए रखता है.

Anonymous said...

हम नही सुधरेंगे.

-असरानी

Anonymous said...

हम नही सुधरेंगे.:)

-असरानी

pukhraaj said...

शौक लगाकर शॉक देने का आपका शौक अच्छा है ....पर हमे इस शॉक का कोई शौक नही

रंजना [रंजू भाटिया] said...

:) यहाँ पर सुधार की गुंजाईश जरा कम है ..डरने वाले नहीं है हिंदी ब्लॉगर ..:) बिजली जाए या कोई और वजह ..वह वजह ही पोस्ट लिखने का कारण बन जाती है सो कोई डरने की बात नहीं है :)

विवेक सिंह said...

देखिए जी , किसी और को डराना आप . हम एडिक्शन से पीड़ित बिल्कुल नहीं . हमने जब चाहा ब्लॉगिंग को छोड़ा और फ़िर जब चाहा शुरू कर दिया !

रंजन said...

ब्लोग बंद कर देते है जी..:)

Murari Pareek said...

aashish ji wo shock to pataa nahi kab lagegaa aap to dara kar abhi shock de rahen hain!!!

अजित वडनेरकर said...

आशीष ऐसी भर्ती की पोस्ट मत किया करो:)

Nirmla Kapila said...

अब आपने कहा है तो गम्भीरता से सोचने वाली बात है मगर ये तो मानने वालि बात है कि ये addiction है और इसकेside effects तो होंगे ही आभार्

AAPNI BHASHA - AAPNI BAAT said...

very nice post. we are very bhaybhit.
ajay kumar soni

महेन्द्र मिश्र said...

मै अल्पना जी के विचारो से सहमत हूँ . आभार अच्छी जानकारी के लिए.

अनिल कान्त : said...

अरे बाप रे ...डर गए हम तो :)

Ratan Singh Shekhawat said...

देखिए जी , किसी और को डराना आप . हम एडिक्शन से पीड़ित बिल्कुल नहीं जब मर्जी हो पोस्ट लिखते है जब मर्जी हो नहीं लिखते | गांव जाते है तब नेट से दूर ही रहते है कभी इसकी जरुरत महसूस नहीं होती |

बी एस पाबला said...

टेंशन की कोई बात नहीं जी, ये तो सब बच्चों के लिए है :-)

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हिन्दी ब्लागर बडी मोटी चमडी के जीव हैं,इन झटकों से उनका कुछ नहीं होने वाला:)

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

अजी दिन रात तो तब बैठेंगे जब ससुरी बिजली आवेगी...और ससुरा बार्डबैडं का बाजा ठीक से बजेगा...

अब सुबह से अब बैठे है हम ....बिजली नही थी ससुरी

Suman said...

nice

roshan Jaswal said...

nice

हिमांशु । Himanshu said...

सुन्दर । पर हमें क्या ?

सैयद | Syed said...

आशीष भाई, डरा क्यूँ रहे हैं ?

डॉ. मनोज मिश्र said...

इ का भइया , काहें डरा रहे हैं.

Udan Tashtari said...

इनका तो हल्के करेंट में काम चल गया. हमारी तबीयत तो ऐसी नासाज है कि २२० वोल्ट का झटका ही लगाना पड़ेगा. :)

Abhishek Mishra said...

बड़ों के लिए तो और भी तगडे झटकों की जरुरत पड़ेगी! :-)

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

ब्लॉगिंग के लिये भी अल्कोहलिक अनानिमस जैसी संस्था का भविष्य है!

कुश said...

ब्लोगर को बिना बताये.. ब्लॉग छुडावे..

बाबा क्लिनिक, मुजफ्फर नगर

वाणी गीत said...

यूं तो ब्लोग्गेर्स भी एक दुसरे को कम झटके नहीं दे रहे हैं !! जो डर गया समझो ...रिक्त स्थान के पूर्ति आप स्वयं करें !!

कुन्नू सिंह said...

साक थैरेपी नही अलकोहल थैरेपी सही है :)

क्या यही खोज रहे थे क्या ? की नेट चलाने के लीये सजा कैसे पाएं

seema gupta said...

डरा ही दिया आपकी इस पोस्ट ने तो ..
regards

Anil Pusadkar said...

बडी मुश्किल से दोबारा लिखना शुरू किया है लगता है वो भी बंद करवाओगे।त

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आशीष जी आप तो बस ब्लॉग को बेहतर बनाने की तरकीब बताओ. आपने तो हमें बहुत बुरी तरह डरा दिया. अपने अलावा हम तो न जाने कितने ब्लॉग से जुड़े हैं. (अरे अपने ही कौन से कम हैं?)
अबकी ऐसे न डराना.

मीत said...

darr ke aage jeet hai ashish bhai...
meet

रंजना said...

यह भी भली कही आपने......

दिलचस्प खबर देने के लिए आभार.

arun said...

हम तो इस सब के डर से पहले ही ब्लोगिंग छोड भाग लिये भईया . अब इत्ता डराओगे तो टिपियाने भी ना आयेगे जी :)

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वहां लाइट रहती होगी आशीष जी, इस्लिये करंट लगा रहे है, यहां तो लाइट ही नहीं रहती....हा..हा..हम बच गये न? अब आराम से लन्च करें डरने की कोई बात नहीं हम सब हैं न...

Nitish Raj said...

बड़ी मुशिकल से कुछ लिखना शुरू किया है, शुरुआत में ही डराने लग गए। तो हम नहीं डरते...गब्बर सिंह...जो डर गया सो मर गया। हा हा हा हा...।
हंसी के अलावा, आज कल जब भी कोई पोस्ट खोलता हूं अपने ब्लाग की, पूरा ब्लाग नहीं(http://nitishraj30.blogspot.com) कोई सिंगल पोस्ट मसलन http://nitishraj30.blogspot.com/2009/07/blog-post_16.html तो वो खुलती नहीं है और लिखा आजाता है एक क्रास निशान के साथ कि ---
Internet Explorer cannnot open the internet site http://nitishraj30.blogspot.com/2009/07/blog-post_16.html, operation aborted.
फिर उसके बाद उसे हटाओ तो लिखा आता है कि द पेज कैननॉट बी डिस्पलेयड। ये क्या प्रोब्लम है काफी दिन से ये प्राब्लम आरही है मुझे लगता है कि जब मुझे ही दिक्कत होती होगी तो दूसरे क्या पढ़ पाते होंगे। हो सके तो मदद कीजिएगा। धन्यवाद।

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

नितिश जी, यह समस्या इंटरनेट एक्सप्लोरर में कई दिन से आ रही है। फायरफॉक्स व गूगल क्रॉम में नहीं है। मेरे यहां भी कुछ ब्लॉग्स पर आती है। मैं समस्या आते ही बैक के बटन पर क्लिक करता हूं तो वह ब्लॉग खुल जाता है। पता नहीं शायद यह तरकीब आपके लिए भी काम करे..परमानेंट इंतजाम ब्राउजर बदलने से हो सकता है.. आभार

बी एस पाबला said...

नीतिश जी, ब्लॉग पर लगा ताला खोल दीजिए। Internet Explorer खुश हो जायेगा। अभी ताला उसे ही डरा देता है :-)

नरेश सिह राठौङ said...

कितने लोगो को डरा दिया, सबसे ज्यादा खतरा तो ताऊ और समीर जी को है बाकी लोगो का बाद मे नम्बर आयेगा । मै ठहरा बाल बच्चो वाला आदमी जो पूरे दिन घर पे रहता हू, मुझे इसकी आदत कैसे लग सकती है । ज्यादा डरना आपको पडेगा क्यू कि आप का ओन लाईन स्टेटस हमेशा आपकी उपस्थिति बताता रहता है ।

डॉ .अनुराग said...

हम बस गुलज़ार साहब के शब्द दोहरा देते है.....

ख्याल फेंका है रफ़्तार -ए-बेपनाह के साथ
खुदा को पहुंचे या उससे परे निकल जाए

की उसके बाद जो पहुंचा तो मुझ तक आएगा

बालसुब्रमण्यम said...

देखिए हम चीन से कितने आगे हैं। वहां ब्लोगरो को शाक दिया जाता है, हम यहां मर्ज की जड़ यानी कंप्यूटर को ही शाक देते हैं। सुना है दिल्ली, हमारी राजधानी, में हर रोज कंप्यूटर को चार-चार घंटे तक शाक दिया जाता है (यानी पावर काट दिया जाता है), ताकि ब्लोगर स्वास्थ्य-लाभ कर सकें।

आखिर यह आयुर्वेद की जन्म भूमि है।

इसलिए बेखौफ ब्लोगिक कीजिए, आपको कुछ नहीं होगा।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

मैं तो नहीं डरा.

Anonymous said...

bahut badiya

Jayshree varma said...

भई हमें तो शौक से बडा डर लगता है लेकिन हम डरने वाले नहीं है.... नई जानकारी के लिए धन्यवाद।

विनीता यशस्वी said...

ye bhi kya khub kahi apne...

Dasanudas said...

शाक से याद आया की चातुर्मास के इस पहले महीने में 'शाक' खाना मना है, तो हमे शाक से डरने की कोई ज़रुरत नहीं| ..........................................................'शाक' यानि की हरे पत्ते वाली सब्जियां

काजल कुमार Kajal Kumar said...

ओह ! मैं तो डर गया

 
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