Friday, November 6

गूगल ने दिया जवाब, किया कूटनीति का खुलासा

हिन्दी ब्लॉग टिप्स ने करीब दो हफ्ते पहले गूगल की ओर से भारत का भ्रमित नक्शा छापने से जुड़ी पोस्ट गूगल, यूं हिंदुस्तानियों के साथ खिलवाड़ न करो प्रकाशित की थी। गूगल ने इस खबर का संज्ञान लिया है और गूगल के आधिकारिक प्रवक्ता ने अपनी इस रणनीति का खुलासा ई-मेल भेजकर किया है।

गूगल का कहना है कि-



गूगल के जवाब का लब्बोलुआब यह है कि कंपनी ने कूटनीति अपनाते हुए अपनी साइट के तीन वर्जन तैयार किए हैं। पहला अंतरराष्ट्रीय वर्जन, दूसरा भारत के लिए और तीसरा चीन के लिए।

अन्तरराष्ट्रीय वर्जन (http://maps.google.com/) में गूगल विवादित सीमाओं को डॉटेड लाइंस से दिखाता है।

भारतीय वर्जन (http://maps.google.co.in/) में गूगल भारतीय दावे के मुताबिक सीमाओं को दिखाता है।

चीनी वर्जन (http://ditu.google.com/) में गूगल चीनी दावे के मुताबिक सीमाएं दिखाता है।



हमें ऐतराज इस बात पर है कि अगर ऐसा है तो फिर चीन के लिए तैयार वर्जन हिंदुस्तान में खुलता क्यों है? उसका एक्सेस कम से कम हिंदुस्तान में तो बंद किया जाना चाहिए।

और गूगल अगर इसे अपना अधिकार समझता है तो हिंदुस्तानी एजेंसियों को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और गूगल डीटू का एक्सेस हिंदुस्तान में बैन होना चाहिए।

हैपी ब्लॉगिंग




क्या आपको यह लेख पसंद आया? अगर हां, तो ...इस ब्लॉग के प्रशंसक बनिए ना !!

हिन्दी ब्लॉग टिप्स की हर नई जानकारी अपने मेल-बॉक्स में मुफ्त मंगाइए!!!!!!!!!!

30 comments:

  1. बात तो सही है.. शायद उन चीनियों के लिये जो हिन्दुस्तान में रहते है...

    ReplyDelete
  2. बहुत खूब भाई आप वाकई ब्लॉग जगत के सरताज हैं... आपके साहस से हम सबमें भी साहस आ जाता है. लगे रहिये और और और अपनी ऊर्जा इसी तरह से सकारात्मक होकर इस्तेमाल कीजिये.

    ReplyDelete
  3. yes sir u r true it should be banned

    ReplyDelete
  4. आपकी बात सही है भारत में सिर्फ भारत के लिए बनाया नक्शा ही खुलना चाहिए चीन वाला नहीं |

    ReplyDelete
  5. सहमत हूँ,आशीश जी से ।

    ReplyDelete
  6. itne sundar prayash ke liye dhanybaad...
    aur likhte rahiye bebak........Subhkamnaye..

    ReplyDelete
  7. शायद माओवादियों के लिये रेफ़रेंस के तौर पर इधर भी खुलता होगा… :)

    ReplyDelete
  8. असली बात तो ये है की सभी वर्जन में निशाना भारत ही क्यों?क्या ऐसे वर्जन अन्य देशों के लिए भी अलग अलग बनाये गए है.....!

    ReplyDelete
  9. आशीष जी सबसे बडी खुशी तो इस बात की है कि आज आपके बहुत दिनों मे दर्शन हुये. और उससे भी बडी खुशी की बात यह है कि आपकी बात मे इतना दम है कि गूगल को भी आपकी बात का संज्ञान लेते हुये जवाब देना पडा.

    चीनी वर्जन भारत मे प्रतिबंधित होना ही चाहिये.

    रामराम.

    ReplyDelete
  10. आशीष जी से सहमत,
    चलिए चीन और गूगल की खटिया खड़ी की जाए.गूगल चीन मुर्दाबाद!

    ReplyDelete
  11. बढ़िया जानकारी उजागर की है!

    ReplyDelete
  12. आशीष जी सबसे पहले तो एक गंभीर मुद्दे को उठाने की सराहनीय पहल और साहसिक प्रयास के लिये बधाई... गूगल से ऐसे ही किसी कूटनीतिक जवाब की अपेक्षा थी... इससे ज़्यादा वो कहते भी क्या... पर कम से कम अब तो गूगल डीटू का एक्सेस हिन्दुस्तान में प्रतिबंधित ज़रूर कर देना चाहिये.

    ReplyDelete
  13. यह हुई ना बात, अब समझ में आया आप कहां व्‍यस्‍त थे, सफल हो के लौटे हैं आप, बधाई
    हमारा भी यही जानना चाहता है के हिंदुस्तान में खुलता क्यों है? वाकई इसका एक्सेस कम से कम हिंदुस्तान में तो बंद किया जाना चाहिए।

    ReplyDelete
  14. गूगल को जवाब देने पर विवश किया ...बहुत बढ़िया ...!!

    ReplyDelete
  15. आपकी बात से सहमत। और, गूगल तक हम हिन्‍दुस्‍तानियों की आवाज पहुंचाने के लिए धन्‍यवाद।

    ReplyDelete
  16. .
    .
    .
    सहमत हूँ आशीष जी...

    ReplyDelete
  17. ये गूगल-फूगल लालाओं की दुकानें हैं..चीन से ज़्यादा फ़ायदे की उम्मीद हुई तो उधर ही हो लेगा...

    ReplyDelete
  18. ये क्या बात हुई अपनी सुविधा के अनुसार तीन वर्जन बना दिए। आशीषजी आपने सही कहा।

    ReplyDelete
  19. अगर बात इतनी ही सीधी है जितनी कि गूगल बताने की कोशिश कर रहा है तो इसकी ये हिम्मत क्यों नहीं होती कि ये क्यूबेक को कनाडा से अलग दिखाए या रूस के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों को रूस से अलग विवादित क्षेत्र की तरह अपने नक्शों में दिखाए.

    दिक़कत हमारी सरकार की भी है कि क्यों नहीं विदेश मंत्रालय इन गूगलियों को बुला कर हड़काता. दो मिनट में इनकी हेकड़ी दुरूस्त की जा सकती है...पर सरकार को फ़ुर्सत कहां...लानत है इस तरह लेटे रहने पर.

    ReplyDelete
  20. गुगल का यह सफाई, पहले से भी ज़्यादा गन्दी है। एक स्थापित एवं ख्यात संस्था को गिरगिटान बनने से बचना चाहिए। गुगल एक ऐसी साइट है जिसे उद्ध्रित किया जाता है, अब उनके इस बयान का मतलब है कि उन्हें कोट नहीं किया जा सकता, क्योंकि वो खुद नहीं जानते कि वे क्या जानते हैं। गुगल को इसकी गम्भीरता को समझना चाहिए और पुन: साफ-सुथरी सफाई देनी चाहिए।

    ReplyDelete
  21. Google ki safaayee santosh janak nahin.

    --Kajal ji ki baat se sahmat hun.

    -Made in china globes mein Bharat se kashmir alag[kataa hua] dikhaya hua hota hai..yahan wo globe bikta hai..
    -kise shikayat karen?aur karen bhi to sunega kaun...??

    -------

    ReplyDelete
  22. मुझे नही मालूम की गोगुल में चीन का नक्शा कैसा दिखाया गया है, मगर यदि तिब्बत को भी ठीक उसी तरह नहीं दर्शाया गया है जैसा की वह भारतीय क्षेत्रो को दर्शा रहा है तो यह सोचनीय बिषय है भारत के लए !

    ReplyDelete
  23. han Ashish....aajkal china kafi ujal- kood machaye hua hai..... hamein bharat sarkaar ki chuppi hi nahi samajh mein aati....bahut ho chuka liberalization ....It's time to take some strong step.

    ReplyDelete
  24. आशीष जी, काजल कुमार की बात सोचने लायक है... हमारे देश के साथ ही ऐसा क्यौं होता है कोई भी आकर हडकाता है और हम सुन लेते है...

    मुम्बई हमले के बाद से सुन रहे है कारवाई के बारे में आज तक कुछ नही हुआ...

    मेरे हिसाब से इन तीनों साइट्स में से दो को बन्द करना चाहिये चीनी और हिन्दुस्तानी वर्जन को... सिर्फ़ एक वर्जन होना चाहिये जिसमें विवादित हिस्से को रेड डाट से दिखा रहे है....

    ये तरीका तो चापलुसी वाला हो गया...बिल्कुल अमेरिका की तरह हमारे देश में हमारा गुणगान और उनके देश में उनका गुणगान...

    ReplyDelete
  25. बिलकुल सही बात । सरकारी उदासीनता और हमारा आलस्य हमारा कितना नुकसान कर रहे हैं - कैसे समझाया जाय ।

    ReplyDelete
  26. इसे कहते है गूगल की कूतनीति ।

    ReplyDelete
  27. aapne bilkul sahi kaha hai ashish bhaai ise hindustan mein ban kiya jaana chahiye... hum hamari dharti par kisi or ka adhikar kyon darshane de...
    meet

    ReplyDelete
  28. आपका प्रयास सार्थक हुया धन्यवाद और शुभकामनायें

    ReplyDelete
  29. i am agree to your point and i think all of us must raise a campaign to wake up indian government so that indian version will be more popular on international level.

    ReplyDelete