Saturday, October 24

गूगल, यूं हिंदुस्तानियों के साथ खिलवाड़ न करो

प्रिय गूगल,

इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम हर इंटरनेट यूजर की ज़रूरत हो और इंटरनेट पर उसके सबसे अच्छे दोस्त हो। यह भी सही है कि तुमने इंटरनेट पर क्रांति का सूत्रपात किया है और इंटरनेट को नए तरीके से परिभाषित किया है। इसी वजह से आज तुम इंटरनेट पर सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में काबिज हो।

लेकिन क्या इस ताकत ने तुम्हें इतना बड़ा बना दिया है कि तुम सम्प्रभु देशों की भौगोलिक सीमाओं को भी अपने हिसाब से बदल सको? दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इतना कमज़ोर समझो कि उसकी भौगोलिक सीमाएं दूसरे राष्ट्रों को समर्पित कर दो।

अब तुम ही देखो। यह गूगल डीटू है। गूगल मैप का तुम्हारा चीनी संस्करण। देखो, इसमें अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कितने बड़े हिस्से को तुम चीन में दिखा रहे हो। और तो और ताइवान को भी तुमने चीन का हिस्सा दिखाया है। हिंदुस्तान का राष्ट्रीय राजमार्ग- 52 (असम से अरुणाचल प्रदेश जाने वाला) भी तुमने अटपटे तरीके से सीमा पर ले जाकर अधूरा छोड़ दिया है। क्या तुम यह सोच रहे हो कि गूगल डीटू पर किसी हिंदुस्तानी की नजर नहीं पड़ेगी? भले ही यह भाषा हम पढ़ नहीं पा रहे हों, लेकिन तुम्हारे (या तुम्हे मोहरा बनाकर ड्रेगन के) मंसूबे यहां स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों की तल्खी का मनौवैज्ञानिक फायदा तुम उस कथित उभरती महाशक्ति को पहुंचाना चाहते हो।



अभी दो महीने पहले ही तुम्हें गूगल मैप पर अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों को चीनी भाषा में दर्शाए जाने पर फटकार लग चुकी है। तुमने माफी मांगी और यह कहा कि देशों के बीच सीमा विवाद में तुम नहीं पड़ते। तुमने गूगल मैप में भी पूरे के पूरे जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को बिंदु रेखा के रूप में दिखाकर उन्हें विवादित करार दिया।



तुम्हारा गूगल एनालिटिक्स भी हिंदुस्तानी नक्शे में जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से को चीन और पाकिस्तान में दिखा रहा है। पता नहीं तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? तुम्हें यू गलत तथ्यों को प्रदर्शित करने का अधिकार कतई नहीं है।



हम हिंदुस्तानी ब्लॉगर तुम्हारे इस कदम (या कहें त्रुटि) की भर्त्सना करते हैं और तुमसे उम्मीद करते हैं कि तुम इस पर जल्द से जल्द कदम उठाओगे और अपने नक्शों को ठीक करोगे।

तुम्हारे इस कदम (या त्रुटि) से हम आहत हुए हैं।

तुम्हारे
हिंदुस्तानी ब्लॉगर


इस विषय पर मेरी (साथी पत्रकार हीरेन जोशी के साथ)विस्तृत रिपोर्ट गूगल ने बदल डाला हमारा नक्शा ! राजस्थान पत्रिका के 24 अक्टूबर, 2009 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित हुई है। इसे नीचे दिए गए चित्र पर क्लिक कर पढ़ा जा सकता है।



हैपी ब्लॉगिंग





क्या आपको यह लेख पसंद आया? अगर हां, तो ...इस ब्लॉग के प्रशंसक बनिए ना !!

हिन्दी ब्लॉग टिप्स की हर नई जानकारी अपने मेल-बॉक्स में मुफ्त मंगाइए!!!!!!!!!!

49 comments:

  1. गूगल को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं .. हम भारतीयों को इसका विरोध करना चाहिए !!

    ReplyDelete
  2. आपकी बात सही है. गब्बर और सांभा आपकी बात का समर्थन करते हैं।

    जय भवानी।

    ReplyDelete
  3. कैसे विरोध करें? किस तरह करें? आप सकबे ब्लाग भी तो गूगल की होस्टिंग के रहमो करम पर हैं! गूगल को बाजार चाहिये और चीन का व्यापार भारत के व्यापार से अधिक है इसलिये तराजू का पल्ला चीन की तरफ ही झुकेगा...

    मैं तो गूगल की सेवाओं का उपयोग नहीं करता, ईमेल का भी नहीं...

    ReplyDelete
  4. हम भी गूगल के इस छेड़खानी का विरोध करते हैं

    इस बारे में पहले संजय बेंगाणी जी भी लिख चुके हैं

    जागो हिन्दुस्तान!!!

    ReplyDelete
  5. विवेक जी,

    संजय बेंगाणी जी वाले आलेख का हवाला यहां दिया गया है। वह मामला गूगल मैप से जुड़ा था, जहां अरुणाचल प्रदेश को डॉटेड लाइन (बिंदु रेखा) से दिखाया गया है।

    इस आलेख में गूगल डीटू (चीन के लिए गूगल की सेवा) की कारस्तानी उजागर की गई है, जिस पर अभी तक कुछ नहीं लिखा गया है। यहां अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का हिस्सा भारत से पूरी तरह गायब कर दिया गया है।


    हैपी ब्लॉगिंग

    ReplyDelete
  6. गुग्गल को लोगो को भ्रमित करने का कोई,अधिकार नहीं है,वासत्विक मानचित्र को दूसरे देशों का भाग दिखाना तो शर्मनाक हैं,और गुग्गल का किसी भी प्रकार इस बात का उत्तर देना औ्रभी शर्मनाक,गुग्गल से सार्बजनिक रूप से इसका उत्तर देने की अपेक्षा करते है,और इस प्रकार की हरकत का ्विरोध करते हैं ।

    ReplyDelete
  7. आज गूगल के बिना इन्टरनेट के बारे में सोचना भी अटपटा सा लगता है... पर इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है की वो हमारे देश के नक्शे के साथ इस तरह से खिलवाड़ करे और हमारी भावनाओं को आहात करे... गूगल के बारे में आपने इस लेख के ज़रिये उस पर पूरी तरह से आश्रित हो चुके हम सब लोगों को इस सच से अवगत कराया इसके लिये आपका हार्दिक धन्यवाद... उम्मीद करते हैं गूगल अपनी इस भूल को जल्द ही सुधारेगा.

    ReplyDelete
  8. यह गलत फहमी है की गूगल के बिना इन्टरनेट नहीं है. हम भी गूगल के इस तुष्टिकरण नीति की भर्त्सना करते हैं.आवश्यक हुआ तो हम गूगल को अपने सिस्टम से blackout भी कर देंगे. दूसरों को मौका मिलेगा.

    ReplyDelete
  9. गलत है , सबको इसका विरोध करना चाहिए और गूगल को इसे जल्द से जल्द सुधारना चाहिए । भारत सरकार को भी इस पर अपना विरोध दर्ज करना चाहिए ।

    ReplyDelete
  10. आशीष जी,
    अब गूगल भी इस 'शीतयुद्ध' में शामिल हो गया?

    ReplyDelete
  11. ऎसे कृ्त्य का तो विरोध होना ही चाहिए......

    ReplyDelete
  12. वाह....!
    क्या मीठी झिड़की दी है।
    आशीष जी आपका भी जवाब नही है।
    आप वास्तव में एक जागरूक ब्लॉगर हैं।

    ReplyDelete
  13. गूगल का यह कृत्य निंदनीय है | इसका पूरा विरोध किया जाना चाहिए |

    ReplyDelete
  14. विरोध करने का एक तरीका ये भी हो सकता है कि हम सभी गूगल को मेल करे और इस बारे में पूछे... उनके पास देश भर से मेल जायंगे तो उन्हें जरुर अपनी गलती का अहसास होगा और भविष्य में ऐसी त्रुटी करने से पहले १०० बार सोचेंगे.....!!!

    और जागरूक ब्लॉगर का देश के प्रति ये एक सच्चा समर्पण भी कहलायेगा.....

    ReplyDelete
  15. मैंने तो कर दिया आशा है आप भी करेंगे...

    We all want to know that why google is not understanding that the parts of India that google tidu and google analytics is showing in china and pakistan are not their part. They are the parts of India. It increases tension between two countries as well as it also decreases the faith of people of India in Google....

    If google will not stop such things than they have to suffer a lot in near future......

    Google should say sorry publicly and should take pledge to not to repeat such mistake in future....

    --
    Regards,
    Ashvin Bhatt

    ReplyDelete
  16. ना जाने ऐसा करके क्या दिखाना चाहता है गूगल। इसका कडा विरोध होना चाहिए।

    ReplyDelete
  17. गूगल का नजरिया न जाने क्यों सदा से भारत विरोधी रहा है . पहले उसने गूगल मैप में भारत के संवेदनशील जगहों को खुले आम दिखया और अब ये
    हिमाकत . विरोध जरूरी है . लगता है चीन का मीडिया मैनेजमेंट भारत से अच्छा है

    ReplyDelete
  18. बार बार...गलत बात है.

    ReplyDelete
  19. मेरा भी विरोध दर्ज किया जाये |

    ReplyDelete
  20. गूग्ल के इस निन्दनीय कुकृ्त्य का विरोध करते हैं । उसे इस पर उचित कदम उठाना चाहिये। हम सब का विरोध दर कर लें धन्यवाद्

    ReplyDelete
  21. ashwin bhatt ji se sahmat... hame google ko mail bhej kar virodh jatana hi chahiye...

    Jai Hind

    ReplyDelete
  22. आशीष जी,बहुत बढिया । शठे शाठ्यं समाचरेत।

    ReplyDelete
  23. चीन की किस किस बात पर विरोध दर्ज करें ...!!

    ReplyDelete
  24. आपके प्रयास के लिए आपको शुभकामनाएं। आप ऐसे ही सजग बने रहें।

    ReplyDelete
  25. आपने इस विषय को उठाकर एक जागरुक ब्लॉगर होने का कर्त्तव्य निभाया है। गूगल को इसके लिए सार्वजनिक रूप से भारत से माफी माँगनी चाहिए।

    ReplyDelete
  26. दुलाराम सहारण10:59 AM GMT+5:30

    *आशीषजी,
    आपका गूगल को धमकाना-चेताना जायज है। आपने विरोध की ऐसी शानदार पहल की, स्‍वागत है। हम सब आपके साथ है। जब तक गूगल संशोधन न कर ले पीछा नहीं छोडेंगे, यहां से भी गृह विभाग को पत्र लिख रहे हैं।

    सादर

    दुलाराम सहारण
    चूरू
    * e-mail resoponse

    ReplyDelete
  27. ऐसी बातें ब्लागर भाई देते रहे हैं परन्‍तु कायदे से आपने दे ही, बधाई, गूगल में चीन की सीमायें तो किया हमें चीन की तरफ, हर तरह से ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है यह तो उसकी एक हरकत है, मैं समझता हूं इसमें गूगल चीन के जिम्‍मेदारों का दखल रहा होगा, ऐसी सैंकडों नापाक हरकतें लेकर वह नये रूप में आँखे दिखा रहा है,

    पिछले दिनों एक अखबार में लेख ''जोशीमठ पर हैं चीन की निगाहें'' पढकर मैं इसके लिये काफी फिक्रमंद हूं लेख यूं आरम्‍भ होता है
    ''पाकिस्‍तान जो हमारे आगे मेमना है हम उसका कुछ नहीं बिगाड सके अब चीन जो एक मगरमच्‍छ है वह तैयारी के साथ सामने है उसका कैसे मुकाबला करेंगे....''

    उम्‍मीद है हम मिलकर हर नापाक हरकत का जवाब दे सकेंगे,

    ReplyDelete
  28. आपके प्रयास के लिए आपको शुभकामनाएं। आप ऐसे ही जागरूक बनाते रहिये,

    ReplyDelete
  29. जैसे गुगल गलती कर रहा है वैसे हमे भी गलती करनी चाहीये

    एक अमेरीका का मैप बनाते हैं गम और उसे आफ्गानीस्तान को डाल देते हैं

    बार बार गलती करना यानी वो जानबुझकर कर रहा है और ईसकेलिय ईंडीया को केश कर देना चाहीये

    ReplyDelete
  30. inko ham dekh lenge...
    ashish bhai aapka shukriya is soochna se logo k avgat karane ke liye...
    or yeh cheen shayad 60 ki ladaai bhool gaya hai...
    beshak tab hamara desh sashkt nahin tha lekin ham jeete or ab is fir se muh ki khilani hogi...
    hum taiyaar hain...
    meet

    ReplyDelete
  31. आशीष जी, आपने ये बात सब लोगो के सामने उठाई उसका बहुत बहुत शुक्रिया....

    मैं अश्विन जी की बात से सहमत हूँ....सिर्फ एक लेख लिखने से कुछ नहीं होगा अभी काम अधुरा है उन लोगो को हमारी भाषा समझ में नहीं आने वाली.......

    इसका सबसे बेहतर तरीका तो ये होगा की गूगल से संपर्क करने के जितने भी ई-मेल पते है उन सबको एक लेख में लिखा जाए और उस लेख को ई-मेल ग्रुप्स, सोशल नेट्वर्किंग तथा और दुसरे तरीके से ज्यादा से ज्यादा हिन्दुस्तानियौं तक पहुचाया जाए और सब लोग अपना विरोध दर्ज कराये.......

    मैं अभी गोवा में हूँ और आज रात को बैंगलोर के लिए निकल रहा हूँ...अभी घर पहुचने में कई दिन लगेंगे तो आपसे गुजारिश है की आप ये काम कर दे.....

    ReplyDelete
  32. कितनी बार तो हो चुका है ऐसा।

    ReplyDelete
  33. इसे मात्र त्रुटि का नाम नहीं दिया जा सकता है। यहाँ एक गम्भीर दुहसाहस है। गलती एक बार हो सकती है, बार – बार नहीं । जानें क्यों हमारी सरकार भी इसका पुरज़ोर विरोध नहीं करती। दोस्ती का हाथ बढाना अच्छी बात है, लेकिन इस कीमत पर नहीं।

    केवल ब्लागर ही नहीं पूरा भारत इसका विरोध करता है

    ReplyDelete
  34. आपका गूगल को धमकाना-चेताना जायज है। आपने विरोध की ऐसी शानदार पहल की, स्‍वागत है। हम सब आपके साथ है। जब तक गूगल संशोधन न कर ले पीछा नहीं छोडेंगे। आपके प्रयास के लिए आपको शुभकामनाएं। आप ऐसे ही सजग बने रहें।

    ReplyDelete
  35. hi.. just dropping by here... have a nice day! http://kantahanan.blogspot.com/

    ReplyDelete
  36. आपकी पोस्ट या आपके द्वारा कहीं भी की गई टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा ब्लाग पर हमारे द्वारा उल्लेखित किया गया है या भविष्य मे किया जा सकता है।


    हमारे ब्लाग टिप्पणी चर्चा का उद्देष्य टिप्पणीयों के महत्व को उजागर करना है। और आपको शामिल करना हमारे लिये गौरव का विषय है।


    अगर आपकी पोस्ट या आपकी टिप्पणीयों को टिप्पणी चर्चा मे शामिल किया जाना आपको किसी भी वजह से पसंद नही है तो कृपया टिप्पणी के जरिये सूचित करें जिससे भविष्य मे आपकी पोस्ट और आपके द्वारा की गई टिप्पणियो को आपकी भावनानुसार शामिल नही किया जायेगा।


    शुभेच्छू
    चच्चा टिप्पू सिंह

    ReplyDelete
  37. ब्लॉगर भाइयो को मिलकर इसका विरोध करना पडेगा तभी गूगल को पता चलेगा

    ReplyDelete
  38. गुरू जी लगता है चीन के स्‍तर की तैयारी में लगे हुये आप, शायद 'गूगल हिन्‍द-चीन सीमा विजेट' बनाने में लगे हैं, ऐसा विजेट जरूर बनाइये, मेरी शुभकामनायें

    ReplyDelete
  39. sabhi indian bloggers ko iska bara ma likhna chayia aur google ko hama sorry kahna chayia

    ReplyDelete
  40. आशीष जि,
    हम ईसको मूहतोड जवाब दे सकते हैं।

    पर सुरूवात आपको करनी होगी।

    कैसे?
    C:\WINDOWS\system32\drivers\etc जा कर "Hosts" फाईल को खोलें और

    ये सबसे निचे पेस्ट कर दें:
    127.0.01 http://googleads.g.doubleclick.net
    127.0.01 http://pagead2.googlesyndication.com
    127.0.01 doubleclick.net
    127.0.01 www.doubleclick.net
    127.0.01 googlesyndication.com
    127.0.01 www.googlesyndication.com
    127.0.01 http://googlesyndication.com

    ईसके बाद गूगल एडसेंस के एड आपको नही दिखेंगे और जैसा की गूगल ने हिन्दी साईटों को हटा दिया तो हम क्यों उसके एड को झेलें????

    ReplyDelete
  41. ये लिंक गूगल एडसेंस के थे। एसा करने के बाद आपको गूगल के एड नही दिखेंगे और आपके कंप्युटर को आराम मिलेगा और कोई भी साईट खोलेंगे जिसपर गुगल एडशेंस हो तब वो साईट जल्दी खूलेगा।

    ReplyDelete
  42. गुरु जी आज का ब्लॉग vichar पर अमल करते हुए मेंnirantar आपको कॉमेंट्स कर रहा हून आप phir भी चीन hind सीमा से वापस नहीं आ रहे, समय से लग रहा हे कमाल का विजेट लाओगे, शुभकामनाएँ

    आपका ब्लॉग विचार:
    ब्लॉगर अगली पोस्ट तभी लिखना पसंद करते हैं, जब पिछली पोस्ट पर टिप्पणियां आए। इसलिए टिपियाते रहिए।

    ReplyDelete
  43. हमें गूगल के इस हरकत से बहुत आघात पंहुचा है....
    हम इसका विरोध करते हैं........

    गूगल को चाहिए वे हमारे देश हिन्दुस्तान से माफ़ी मांगे ......
    अपने किये पर पछताए .

    और अपने द्वारा किये गए मैप त्रुटी को जल्द से जल्द ठीक करे.......

    वरना एक दिन हम हिन्दुस्तानी लोग गूगल का त्याग करने में देर नहीं लगेगी....

    भारत माता की जय.....
    वन्दे मातरम्......

    ReplyDelete