Tuesday, July 28

स्टाइलिश रिलेटेड पोस्ट तस्वीर के साथ (You might also like widget)

हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर आप हर पोस्ट के खत्म होने के तुरंत बाद तीन रिलेटेड पोस्ट देख रहे होंगे। You might also like शीर्षक के साथ आपको ये विजेट तीन पोस्ट की तस्वीर और हेडिंग दिखा रहा होगा। अगर आप हिन्दी ब्लॉग टिप्स के मुखपृष्ठ पर जाएंगे तो वहां मौजूद दस पोस्ट के सारांश के नीचे यह अलग-अलग रिलेटेड पोस्ट दिखाता मिलेगा। इस विजेट को लगाने के बाद से इस ब्लॉग के पिछले लेखों की विजिट अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है और मैं आपको भी सलाह दूंगा कि इसे अपने ब्लॉग पर लगाएं।

इसे लगाना बहुत ही आसान है। यूं कहें कि चुटकियों का काम है। लिंकविदिन वेबसाइट के इस लिंक पर क्लिक करें। ई-मेल पता, ब्लॉग का पता, प्लेटफॉर्म (ब्लॉगर/वर्डप्रेस/अन्य) चुने और रंग संयोजन भी। इसके बाद Get Widget पर क्लिक कीजिए। अगले पेज पर आपको Install Widget लिखा मिलेगा। इस पर क्लिक करते ही यह आपके ब्लॉग तक पहुंच जाएगी। अगर आप बेहतर नतीजे चाहते हैं तो इसी पेज पर दिए गए निर्देशों का पूर्णतया पालन कर लीजिए।

स्टाइलिश रिलेटेड पोस्ट विजेट के फायदे

1. यह रेंडमली पोस्ट दिखाता है। यानी हर बार पेज खोलने पर आपको अलग-अलग पोस्ट दिखती हैं।

2. पोस्ट के साथ मौजूद तस्वीर भी दिखने से उस पर विजिट की संभावना बढ़ जाती है।

3. इसे लगाना बहुत ही आसान है।

तो देर किस बात की.. तुरंत लगाइए यह विजेट.. हैपी ब्लॉगिंग :)






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Thursday, July 23

क्या आप भी फेसबुक, ऑरकुट और ट्विटर पर मौजूद हैं ?

यह पोस्ट आपको ऑरकुट और फेसबुक पर मौजूद दोस्तों के जन्मदिन गूगल कैलेंडर में जोड़ने का आसान सा तरीका सिखाएगी..
वैसे तो मैं सोशल नेटवर्किंग साइट्स को ज्यादा पसंद नहीं करता, क्योंकि इनमें अनचाहे लोग अनचाहे तरीके से आपको अनचाही बात कह देते हैं, लेकिन फ़िर भी मैं अच्छी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने प्रोफाइल मेंटेन करता हूं। कारण यह है कि इससे कई बार मेरा भूले बिसरे दोस्तों से मिलना हो जाता है, तो अक्सर कुछ अच्छे लोगों के साथ संपर्क का मौका भी मिलता है। साथ ही ब्लॉग पर भी कुछ विजिटर्स बढ़ते हैं। वैसे मैं इन पर मुश्किल से हफ्ते में आधा घंटा ही खर्च करता हूं।

इनका एक और फ़ायदा यह भी है कि इसमें दोस्तों के जन्मदिन का पूर्ण ब्योरा मौजूद रहता है और ये साइट्स उन्हें आसानी से विश करने में मदद करती हैं। पिछली पोस्ट में मैंने आपको गूगल कैलेंडर की जानकारी दी थी और वादा किया था कि आपको अपने गूगल कैलेंडर में एक क्लिक पर ऑरकुट और फेसबुक के दोस्तों के जन्मदिन जोड़ने की जानकारी दूंगा।

पेश है वह तरीका-

यहां क्लिक करें और ऑरकुट दोस्तों के जन्मदिन को सीधे अपने गूगल कैलेंडर में जोड़ें

यहा क्लिक करें औऱ फेसबुक दोस्तों के जन्मदिन अपने गूगल कैलेंडर में जोड़ें

गूगल कैलेंडर में दोस्तों के जन्मदिन जोड़ने का एक फ़ायदा यह भी है कि वहां केवल आगामी चंद दिनों के जन्मदिन ही नज़र आते हैं, जबकि कैलेंडर में एंट्री होने के बाद सभी दोस्तों के जन्मदिन चुटकियों में पता लगा सकते हैं।

वैसे आप चाहें तो मेरे साथ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी कनेक्ट हो सकते हैं-

मेरा ऑरकुट प्रोफाइल

मेरा फेसबुक प्रोफाइल

मेरा ट्विटर प्रोफाइल

आज के लिए इतना ही.. हैपी ब्लॉगिंग।





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Saturday, July 18

कितने काम का है गूगल कैलेंडर ?

काफ़ी समय से प्रकाश बादल जी गूगल कैलेंडर के बारे में जानना चाह रहे थे और मैं आलसी उन्हें हर बार टालता जा रहा था। आज उन्होंने मुझे स्पष्ट शब्दों में कह ही दिया कि अगर मैंने इसके बारे में पोस्ट नहीं लिखी तो उनके मेरे संबंध भारत-चीन संबंधों की तरह "मधुर" हो जाएंगे। तो आज आपके सामने मैं गूगल कैलेंडर की खूबियां लिखने को मजबूर हूं। यकीन मानिए कि मैं अपनी इस मजबूरी से आपको पकाने नहीं जा रहा हूं। गूगल कैलेंडर वाकई बड़े काम की चीज़ है और हर ब्लॉगर को इसकी सुविधाओं के बारे में पता होना ही चाहिए।

बात शुरू करें उससे पहले गूगल कैलेंडर के फ़ायदे की एक बानगी देख लीजिए-

बी एस पाबला जी ने कई ब्लॉगर साथियों के जन्मदिन को गूगल कैलेंडर के रूप में एक जगह संजोया है। देखिए कितनी आसानी से हमें सभी के जन्मदिन की जानकारी इस कैलेंडर की मदद से हो रही है।

गूगल कैलेंडर के फायदे-

अब आते हैं मुद्दे की बात पर। सबसे पहले जानते हैं कि गूगल कैलेंडर की मदद से हम क्या क्या कर सकते हैं।

1. महीने, हफ्ते, दिन और घंटे के हिसाब से अपनी दिनचर्या के महत्वपूर्ण कार्यों को पहले से यहा फीड कर सकते हैं औऱ उसके बाद नियत समय पर उसकी सूचना ई-मेल या अपने मोबाइल फोन पर पा सकते हैं।

2. मर्ज़ी के हिसाब से अपने कैलेंडर को दोस्तों के साथ शेयर कर सकते हैं यानी आपको यह भी पता चल सकता है कि आपके मित्रों की दिनचर्या में क्या खास बातें होने वाली हैं।

3. अगर आप किसी खास परियोजना की समय सारिणी बनाना चाहते हैं या दोस्तों के जन्मदिन की जानकारी एक जगह रखना चाहते हैं तो वह भी यहां संभव है।

4. कैलेंडर को ब्लॉग के विजेट या पोस्ट में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। कैलेंडर बनाने के बाद इसके इम्बैडेड कोड को ब्लॉग पर आसानी से लगाकर सभी को अपने खास कार्यक्रम दिखाए जा सकते हैं।

कैसे इस्तेमाल करें गूगल कैलेंडर ?

1. इस लिंक पर क्लिक करें और उसके बाद अपने जीमेल खाते का उपयोग कर गूगल कैलेंडर के लिए लॉगइन करें।

2. संबंधित तारीख या समय पर कोई गतिविधि को जोड़ने के लिए बाईं ओर दिए गए Add Event बटन पर क्लिक करें। और घटना का समय और विवरण भर दीजिए।

3. दूसरे कैलेंडर जोड़ने के लिए My Calendars के नीचे दिए गए Add विकल्प पर क्लिक कीजिए औऱ पहले की तरह नया कैलेंडर बना लीजिए।

4. अगर आप कैलेंडर को केवल अपने निजी इस्तेमाल के लिए रखना चाहते हैं तो आपको कोई सैटिंग बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप यह कैलेंडर खास दोस्तों या सार्वजनिक रूप से शेयर करना चाहते हैं तो कैलेंडर के नाम के आगे वाले तीर पर क्लिक कीजिए औऱ उसके बाद Share this calendar पर क्लिक कीजिए। अगर दोस्तों के साथ शेयर करना चाहते हैं तो उनके ई-पते भर दीजिए और अगर सभी के साथ शेयर करना चाहते हैं तो इसे पब्लिक पर सैट कर दीजिए। याद रखें कि पब्लिक कैलेंडर सभी को दिखाए देते हैं औऱ गूगल सर्च में भी नज़र आते हैं।

5. अगर आप कैलेंडर को अपने ब्लॉग पर टांगना चाहते हैं तो Calendar setting पर क्लिक कीजिए और यहां से कैलेंड का इमबैडेड कोड ले आइए औऱ इसे अपने ब्लॉग पर टांग लीजिए।

नोटः एक खास तरीके से आप अपने गूगल कैलेंडर में ऑरकुट मित्रों के जन्मदिन की जानकारी एक क्लिक की मदद से जोड़ सकते हैं। जहां ऑरकुट पर केवल आने वाले दिनों के जन्मदिन वाले मित्रों की ही जानकारी होती है, वहीं इस तकनीक से आप सभी मित्रों के जन्मदिन कैलेंडर के रूप में पा सकते हैं। अगली पोस्ट इसी विधि पर होगी।




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Wednesday, July 15

ब्लॉगर साथियो, अब भी वक्त है सुधर जाओ..

मैं आज सुबह से डरा हुआ हूं। न तो सुबह की चाय ठीक से पी पाया हूं और न ही लंच ही ठीक से कर पाया हूं। काम में भी मन नहीं लग रहा है। ब्लॉग को तो खोलकर भी नहीं देखा है। वजह मत पूछिएगा। वरना आप भी डर जाएंगे। क्या कहा आप नहीं डरेंगे। बड़े बहादुर हैं। क्या आप मेरी तरह ब्लॉग एडिक्शन से पीड़ित नहीं हैं। देखिए चीन में इंटरनेट एडिक्शन किस तरह से छुड़वाया जा रहा है। आज के एक अखबार में छपा यह चित्र मेरे मन में दहशत फैला गया है, क्योंकि इस खास बीमारी के सारे लक्षण हम चिट्ठाकारों में भी है। कहीं यही तरीका हमें भी अपनाना पड़ा तो !!!!!!!!!!!!!

बड़ा देखने के लिए क्लिक करें (साभारः राजस्थान पत्रिका)





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Monday, July 13

जहां हम खड़े हो जाते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है..

एक साल 3 महीने और 1 हफ़्ते के दौरान हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर करीब 185 पोस्ट लिखी गईं। इतना लिखने के बावूजद कुछ खास लाइनें ऐसी भी रहीं, जिन्हें मैं कभी नहीं लिख पाया। ये खास लाइनें थीं मेरे प्रोफाइल का About me (मेरे बारे में) वर्णन। अक्सर साथी पूछते थे कि मैंने अपने बारे में कुछ क्यों नहीं लिखा। दरअसल मुझे कभी सूझा ही नहीं कि मैं अपने बारे में क्या लिखूं, क्योंकि मेरे पास अपने बारे में कुछ लिखने को था ही नहीं। वैसे मेरे पास लिखने को अब भी नहीं है, लेकिन फिर भी आप आज इस वर्णन में कुछ लिखा देख रहे होंगे।


मैं आभारी हूं अनूप शुक्ल "फ़ुरसतिया" जी का, जिन्होंने अपनी चिट्ठाचर्चा में मेरे बारे में इतनी सम्मानजनक पंक्तियां लिखीं और मेरा प्रोफाइल पूरा करने में मदद की। आखिर हीरे की परख जौहरी ही जानता है :)


मैं आभारी हूं पचास से अधिक उन सभी साथियों का (अधिकतर ऐसे जो मेरे ब्लॉग पर पहली बार आए), जिन्होंने पिछली पोस्ट क्या टिप्पणी पाने के लिए खुद भी टिपियाना ज़रूरी है ??? पर अपने मूल्यवान विचार दिए और इस सार्थक मुद्दे के सभी पहलुओं को टटोलते हुए इसे अब तक की सबसे बड़ी बहस बनाया और एक निष्कर्ष तक पहुंचाया।

मैं सभी नये नवेले साथियों की ओर से फ़ुरसतिया जी को वादा करता हूं (उनके ऐतराज के बाद) कि हम सब आईंदा किसी भी विषय पर लिखने के दौरान ध्यान रखेंगे कि कहीं उस विषय पर लेखन का अधिकार किसी ब्लॉगर विशेष के पास सुरक्षित तो नहीं। यह भी ध्यान रखेंगे कि हम पोस्ट तभी लिखेंगे, जब हमें उस पोस्ट से कुछ मिलने वाला हो। साथ ही हम यह भी वादा करते हैं कि पोस्ट लिखने से पहले इंटरनेट को पूरी तरह खंगालकर यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं विद्वान लोग उस विषय पर पहले कुछ कह तो नहीं चुके। अगर वे तनिक भी कह चुके होंगे तो लिंक के साथ उनका उल्लेख हम जरूर करेंगे अब तो आप सीनियर लोग नये नवेलों की रैगिंग नहीं लेंगे न :)





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Saturday, July 11

क्या टिप्पणी पाने के लिए खुद भी टिपियाना ज़रूरी है ???

आज शनिवार है तो सोचा कि क्यों न कुछ हल्की फुल्की बात की जाए। मन में विचार आया कि हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर साथियों को ब्लॉगिंग के विषयों पर विचार-विमर्श का ऐसा मंच दिया जाए, जिस पर वे अपनी बात खुलकर कह सकें। सभी का स्वस्थ मनोरंजन भी हो और हिन्दी ब्लॉगिंग के कुछ अनछुए पहलुओं को भी टटोला जा सके।

आज के विचार-विमर्श का मुद्दा है-

क्या हिन्दी जगत में ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए खुद भी उनके ब्लॉग पर टिपियाना ज़रूरी है ???

इस मुद्दे पर आपकी राय सभी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, इसलिए कमेंट जरूर कीजिए। हो सकता है कि अगर यह बात स्थापित हो गई कि टिप्पणी के बदले ही टिप्पणी मिलती है तो मैं आपके ब्लॉग पर टिपियाने आ जाऊं :)

नोटः मिसाल के रूप में किसी ब्लॉग या ब्लॉगर विशेष का नाम लिया जाना वर्जित है। साथ ही बहस में अनाम (या छद्म नाम वाले) टिप्पणीकारों की टिप्पणियां भी शामिल नहीं होंगी।




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Tuesday, July 7

कितनी बार पढ़ी गई आपकी हर पोस्ट (per post hit counter)

अपडेट (8 जुलाई 2009): पिछली स्क्रिप्ट लोड होने में वक्त ज्यादा लेती थी और कमेंट करने के बाद दिखाने वाले पेज की संख्या अलग दिखाती थी। इसलिए कोड बदलते हुए पोस्ट को अपडेट किया गया है। सहयोग के लिए धन्यवाद।
अगली पोस्ट में यह विजेट आसानी से साइडबार में लगाने का तरीका..
पिछले काफी दिनों से कुछ साथी यह सवाल पूछ रहे थे कि जिस तरह से ब्लॉग पर विजिटर्स की संख्या का पता हिट काउंटर लगाता है, क्या हर पोस्ट के लिए रीडर्स की अलग-अलग संख्या का पता चल सकता है। यह काम php स्क्रिप्ट की मदद से हो सकता है, लेकिन समय की कमी की वजह से मैं इसे तैयार करने से बचता रहा। आज सुबह दिल्ली के सॉफ्टवेयर इंजीनियर और तकनीकी ब्लॉग (अंग्रेजी) लेखक अमित जैन की ई-मेल मिली। उन्होंने बताया कि वे यह स्क्रिप्ट तैयार कर चुके हैं और इसे विजेट के रूप में हिन्दी ब्लॉगर साथियों को पेश करना चाहते हैं।
मुझे उनकी पेशकश अच्छी लगी और इस पर थोड़ा शोध करने के उपरांत मुझे पता चला कि अमित से पहले यह स्क्रिप्ट काफी सरल रूप में अनुज पठानिया तैयार कर चुके हैं। इसके बाद मैंने पठानिया की अपलोड की गई स्क्रिप्ट को इस्तेमाल किया और पूरे एक दिन इसे आजमाने के बाद महसूस किया कि यह लोड होने में थोड़ा वक्त लेती है। इस बीच मुझे अमित जैन की स्क्रिप्ट पसंद आई और इससे हिन्दी ब्लॉगर साथियों के लिए काफी सुंदर और लाभदायक विजेट तैयार हो गया।

यह विजेट आपको पोस्ट के हेडिंग के नीचे दिख रहा होगा। इससे पता चलता है कि इस पोस्ट को अब तक कितने पाठक पढ़ चुके हैं। क्या आप अपने ब्लॉग पर इसे लगाना चाहते हैं। इसका तरीका काफी सरल है।

1. लेआउट में जाइए।

2. एडिट एचटीएमएल पर क्लिक कीजिए। (एचटीएमएल कोड में परिवर्तन करने से पहले अपनी टेम्पलेट का बैकअप जरूर रखें। इससे आप अपनी मूल टेम्पलेट फिर से पा सकते हैं। टेम्पलेट को डाउनलोड करने का तरीका यहां दिया गया है।)

3. Expand Widget Templates को आवश्यक रूप से टिक कर दीजिए।



4. कोड में नीचे दिए गए हिस्से को ढूंढिए। सबसे अच्छा तरीका है Cont + F कुंजियों को दबाइए। एक फाइंड बॉक्स खुलेगा। इसमें नीचे दिए गए कोड को कॉपी कर पेस्ट कर दीजिए। एंटर करते ही आप कोड के इस हिस्से तक पहुंच जाएंगे।

<p><data:post.body/></p>


इसके ठीक ऊपर ध्यानपूर्वक यह कोड पेस्ट कर दें-

<b:if cond='data:blog.pageType == &quot;item&quot;'>
<div id='hit-counter'>
<p><script src='http://www.amitjain.co.in/hindiviews.php' type='text/javascript'/></p>
</div></b:if>


कॉपी करने के बाद इस कोड को अपनी टेम्पलेट में पेस्ट करने का तरीका इस इमेज में दिखाया गया है-


इसके बाद टेम्पलेट को सेव कर दें।


अब आपको अपनी पोस्ट के हेडिंग के नीचे वह संख्या नज़र आने लगेगी, जितनी बार आपकी पोस्ट पाठकों ने खोली होगी। इससे आपको यह जानने में भी मदद मिल सकती है कि आपकी कौनसी पोस्ट कितनी लोकप्रिय रही है।

नोट- इस विजेट की सिर्फ एक कमी है और वह यह कि पुरानी प्रविष्ठियों पर भी यह काउंटर 1 संख्या से ही शुरू होगा। यानी इसे लगाने से पहले पोस्ट पढ़ चुके पाठकों की संख्या को यह नहीं गिन पाएगा। नई पोस्ट लिखने पर उसकी सटीक पाठक संख्या यह काउंटर जरूर बताता रहेगा।






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