Saturday, June 27

बधाई दीजिए, हिन्दी ब्लॉग टिप्स आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इतरा रहा है..

कॉपीस्केप वेबसाइट से पता लगाइए कि आपके ब्लॉग से चुराई गई सामग्री इंटरनेट पर कहां-कहां मौजूद है..
कौन कहता है कि ऑस्ट्रेलिया में हम हिंदुस्तानियों के खिलाफ़ नस्लभेद हो रहा है? हिन्दी ब्लॉग टिप्स को तो वहां ऐसा दर्जा दिया जा रहा है, जैसा कभी हिंदुस्तान में भी नहीं मिला। वहां के एक विश्वविद्यालय ने हिन्दी ब्लॉग टिप्स को अपनी ई-लर्निंग स्टाफ लिस्ट में शुमार बताया है। यहां इस ब्लॉग का केवल नाम ही नहीं है, बल्कि पूरा का पूरा ब्लॉग फ्रेम के रूप में मौजूद है। यह यूनिवर्सिटी है- आस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वहां की बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है और सरकारी अनुदान पर चलती है। देखिए इसकी वेबसाइट पर हिन्दी ब्लॉग टिप्स कहां और कैसे मौजूद है



अब यह मत पूछिए कि यह ब्लॉग वहां तक कैसे पहुंचा और पूरा का पूरा फ्रेम वहां कैसे दिखने लगा। इस सवाल को पूछने से आपको इसलिए रोक रहा हूं कि इसका जवाब तो मुझे भी नहीं पता। खैर हमें तो आम खाने से मतलब, पेड़ क्यों गिने। आप बधाई दे ही दो।

इतने से दिल नहीं भरा तो एक खुशख़बर और झेलिए। हिन्दी ब्लॉग टिप्स से आपका यह साथी भले ही एक धेला नहीं कमा रहा हो, लेकिन कोई तो है, जिसकी जेबें भर रही हैं। बताऊं कौन- यह देख लीजिए। लिखा तो यह है कि यह अंग्रेजी से रोमानियाई अनुवाद है, लेकिन मुझे तो गूगल विज्ञापनों के बीच विशुद्ध हिन्दी ही दिख रही है। पता नहीं यह वेबसाइट दुनिया भर के ब्लॉगों के अनुवाद के नाम पर कितनी चांदी कूट रही होगी।

अब आप सोच रहे होंगे कि ये करतूतें मुझे कैसे पता चलीं। साहब, जागरुक रहना पड़ता है। तो आप भी जागरुक हो जाइए और कॉपीस्केप नामक इस वेबसाइट पर जाइए। यहां अपनी ब्लॉग का पता भरिए और देख लीजिए कि आपके ब्लॉग से चुराई हुई सामग्री इंटरनेट पर कहां-कहां मौजूद है। वैसे मेरे जैसे चिट्ठाकारों की सामग्री तो कोई चुरा कर भी क्या करेगा :)




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Friday, June 26

बेनामी टिप्पणीकारों, तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता

यह पोस्ट खास तौर पर उन बहादुर और क्रांतिकारी साथियों के लिए लिखी गई है, जो आत्म तुष्टि के लिए खुद के और दूसरों के चिट्ठों पर अनाम टिप्पणियां छोड़ रहे हैं, ठहरे हुए पानी में कंकड़ उछाल रहे हैं और शांत समझे जाने वाले हिन्दी ब्लॉग जगत में नया बवाल लाने की सफल कोशिश कर रहे हैं। मैं ऐसे साथियों के जज़्बे को सलाम करता हूं कि वे अपना अमूल्य समय और योगदान देकर ब्लॉगीवुड में खलनायक का किरदार निभा रहे हैं और मेरे जैसे तुच्छ चिट्ठाकारों को पोस्ट लिखने की एक महत्वपूर्ण वजह दे रहे हैं।

आज रचना जी की यह पोस्ट पढ़ी। वहां बिना मोडरेशन लगाए अनाम टिप्पणियों को ब्लॉग पर सरेआम दिखने की छूट देने वाले साथियों को बताया गया है कि वे किस तरह आसानी से अनचाहे टिप्पणीकार का आईपी पता नोट कर उसे बंद करा सकते हैं। रचना जी की जानकारी ज्ञानवर्द्धक है, लेकिन मुझे यह कुछ अधूरी सी महसूस हुई। इसी वजह से इसे आगे बढ़ाने की इजाज़त मैं रचना जी से चाह रहा हूं।

आगे बढ़ें, उससे पहले मैं अनाम रहकर टिप्पणी करने वाले साथियों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं। पहली बात तो यह कि, उनका आईपी एड्रेस पता कर पाना थोड़ा मुश्किल है। दूसरी बात यह कि आईपी एड्रेस पता भी चल गया तो भी उससे हुई abuse की घटना साबित करने में कई पापड़ बेलने पड़ेंगे। आईपी एड्रेस बंद करा पाना तो एक उठाईगिरी की घटना पर फांसी की सज़ा दिए जाने जैसा है। ऐसा कभी नहीं होगा, इसलिए आप आराम से अपना काम करिए और ब्लॉगीवुड को कृतज्ञ करते रहिए।

अगर आपके निशाने वाले ब्लॉगर ने स्टेटकाउंटर या एक्टिवमीटर जैसा कोई कोड अपने ब्लॉग पर लगा रखा है, जिससे हर विजिटर का आईपी एड्रेस पता चल जाता है, तो भी आप मत घबराइए। वजह यह है कि ऐसा करने पर अगर उसके ब्लॉग पर थोड़ा भी ट्रेफिक रहता है तो क्या पता उस समय अंतराल में कौन आया कौन गया। अब शक की सुई घूमेगी उस समय अंतराल के हर विजिटर पर। तो बच गए न आप।

अगर ट्रेफिक कम हुआ तो भी आपका पता चल पाना मुश्किल है। वह ऐसे- कि वहां आईपी एड्रेस के साथ वह समय आता है, जब आपने पेज खोला। कमेंट करने का समय नहीं आता। अब आप इतने ज्ञानी तो हैं नहीं कि पोस्ट खोलते ही कमेंट कर देंगे। पांच-दस मिनट भी लग गई तो उस दौरान तो कोई न कोई शरीफ आदमी वहां जरूर आएगा। तो शक की सुई घूमेगी उधर।

चलिए अब मान लेते हैं कि किसी भी तरह आपका आईपी एड्रेस आपके शिकार ब्लॉगर के हाथ लग गया। अब क्या? whois डायरेक्ट्री से उसने आपके शहर और सेवा प्रदाता का पता भी लगा लिया। आपकी किस्मत बुरी है और डायनेमिक की बजाय आपका आईपी भी स्टेटिक है और आपकी शिकायत हो भी गई तो उस शिकायत के साथ संबंधित ब्लॉगर से सबूत मांगा जाएगा। अब सबूत तो है ही नहीं... स्टेट काउंटर जैसी रिपोर्ट को साक्ष्य का दर्जा ही नहीं है। साक्ष्य माना जाता है केवल ई-मेल का मुखड़ा, जिसमें किसी भी तरह की हेर-फेर नहीं हो सकती। यकीन नहीं होता तो यहां क्लिक कर कुछ सवाल-जवाब पढ़ लीजिए। हो गया न डाउट दूर।

तो अनाम साथियों आप आराम से अपने काम में लगे रहिए। आखिर कुछ साथियों ने अनाम का विकल्प खुला रख छोड़ा है, टिप्पणियों को मॉडरेट नहीं करते तो आप उनकी इस सेवा का जमकर फायदा उठाइए।

मेरे काबिल दोस्तो, मुझे पूरा भरोसा है एक न एक दिन आपकी आत्मा जरूर जागेगी और उस दिन आपको अहसास होगा कि आपने क्या किया। हो सकता है आप तब तक कितने ही साथियों पर इस समय और पैसे की बर्बादी वाली ब्लॉगिंग से दूर करने का अहसान कर चुके हों, कुछ लोगों के बीच अकारण वैमनस्य बढ़ा चुके हों या कितने ही लोगों के बीच गलतफहमियां पैदा कर चुके हों। ईश्वर आपको सदबुद्धि दे।




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Monday, June 22

अपने डोमेन पर शिफ़्ट होने के फ़ायदे और नुकसान

पिछली पोस्ट में ब्लॉगर डैशबोर्ड पर गूगल विज्ञापनों की दखलंदाज़ी और अपने डोमेन पर शिफ़्ट होने के विकल्प की बात कही गई थी। इसके जवाब में टिप्पणियों और ई-मेल के रूप में सौ से ज़्यादा साथियों के संदेश प्राप्त हुए और ज़्यादातर ने अपने ब्लॉग को अपने डोमेन पर शिफ़्ट होने में रूचि दिखाई। कुछ साथियों ने यह भी सुझाव दिया कि ब्लॉग को अपने डोमेन पर शिफ़्ट करने में ज़्यादा समझदारी नहीं है, क्योंकि यहां सालाना पैसा देना पड़ता है, जबकि ब्लॉगर पर सबकुछ मुफ्त में उपलब्ध है।

सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए मैंने यह पता लगाने की कोशिश की कि ब्लॉग को अपने डोमेन पर शिफ्ट करने के क्या फ़ायदे और नुकसान है। आप इन्हें गंभीरता से पढ़ें और उसके बाद तय करें कि आप ब्लॉग को अपने डोमेन पर ले जाना पसंद करेंगे, या जो चल रहा है उसे वैसे ही चलने देंगे।

अपना डोमेन क्यों लें?

  • 1. आपके ब्लॉग की छवि सुधरती है और उसके साथ लगे blogspot शब्द से छुटकारा मिल जाता है। जैसे- http://MYSITE.blogspot.com आपकी मर्ज़ी के मुताबिक़ http://MYSITE.com में बदल जाता है। इसके ब्लॉग का यूआरएल आकर्षक भी बन जाता है और प्रोफ़ेशनल भी लगने लगता है। मिसाल के तौर पर देखिए- taau.in और gyandarpan.com

    2. ब्लॉग का नियंत्रण पूर्ववत रहता है, अर्थात् आप पोस्ट का प्रकाशन पहले की तरह कर सकते हैं और समस्त सैटिंग्स भी पहले की तरह ही कस्टमाइज कर सकते हैं।

    3. ब्लॉग का पुराना पता खोलने पर भी पाठक सीधे ही खुद-ब-खुद नए पते पर रिडायरेक्ट हो जाता है। अर्थात् आपके पुराने पाठक भी नए पते पर अपने आप ही पहुंच जाते हैं। पाठकों के खोने या भ्रमित होने की कोई चिंता नहीं।

    4. ब्लॉग के स्वरूप पर कोई फर्क़ नहीं पड़ता। ब्लॉग के फॉलोवर, टिप्पणियां और साइडबार की समस्त चीज़ें पहले ही की तरह यथावत रहती हैं।

    5. अगर भविष्य में कभी आप ब्लॉगर को छोड़कर वर्डप्रेस या अपने स्वयं के स्पेस पर आने का मन बनाएं तो इसमें ज्यादा परेशानी नहीं होती, क्योंकि पाठकों का सीधा संपर्क आपके डोमेन नेम से होता है। प्लेटफॉर्म बदलने पर भी आपका डोमेन वही रहता है क्योंकि अपने डोमेन के मालिक आप खुद हैं।

    6. अगर आप एक से ज्यादा ब्लॉग संचालित करते हैं या ऐसा विचार रखते हैं तो आप उन्हें एक ही डोमेन पर ला सकते हैं। मिसाल के तौर पर आप rampuriapc.blogspot.com को www.taau.in पर देख सकते हैं, rampyariko.blogspot.com को rampyari.taau.in पर और maggababa.blogspot.com को maggababa.taau.in पर। मतलब एक ही डोमेन नेम की अलग-अलग सबडायरेक्ट्री बनाकर कई ब्लॉग्स को एक ही छत्र के नीचे लाया जा सकता है। यह अपने आप में एक संपूर्ण वेबसाइट बनाने का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है।

    7. एक एडवांस तकनीक के जरिए आपको ई-मेल पता भी आपके डोमेन नेम पर ही मिल सकता है। जैसे ताऊजी का पता- taau@taau.in

    8. एक साल डोमेन संचालन के बाद अगर अगले साल उसे नवीनीकरण न कराकर आप फिर से ब्लॉगर वाले पते पर आना चाहते हैं तो वह विकल्प भी आपके लिए खुला है।

    9. ज्यादातर सर्च इंजन और एलेक्सा जैसे रैंकिंग सिस्टम ब्लॉगर वाले पते के मुकाबले स्वंय के डोमेन पते को ज्यादा तरजीह देते हैं। इसलिए अगर आप अपने डोमेन पते पर आते हैं तो आपके ब्लॉग की रैंकिंग सुधरने में मदद मिलती है।


अपना डोमेन क्यों नहीं लें?

  • 1. ब्लॉगर की सेवा पूरी तरह मुफ्त है, जबकि यहां डोमेन नेम खरीदने के लिए करीब 500 रुपए खर्च करने पड़ते हैं और उसके बाद हर साल करीब इतने ही रूपए नवीनीकरण के रूप में देने होते हैं।

    2. मान लीजिए आपने डोमेन एक साल के लिए खरीदा है और आपने इसका नवीनीकरण नहीं कराया तो यह डोमेन किसी और को जारी कर दिया जाता है। इसलिए हर साल नवीनीकरण जरूरी है, जबकि ब्लॉगर वाले पते पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।

    3. डोमेन नेम के कंट्रोल पैनल को शुरुआती स्तर पर संचालन करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है।

    4. आपको अपने बैकलिंक्स (हवाले) का नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि वे पहले ब्लॉगर वाले पते को दिए गए हैं और अब वे आपके डोमेन नेम को मिलेंगे। इसलिए सर्च इंजनों के बेहतर नतीजों के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।


इन सभी वजहों पर विचार करने के बाद मैं यह जानने के लिए उत्सुक हूं कि आप अपने डोमेन पर शिफ्ट होने में दिलचस्पी ले रहे हैं या नहीं। टिप्पणी के जरिए अपनी राय ज़रूर बताएं, जिससे इस विषय को और आगे बढ़ाया जा सके और डोमेन नेम पर शिफ्ट होने के सरलतम तरीके पर अगली पोस्ट लिखी जा सके। वैसे इन सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद मैं तो अपने डोमेन पर जाने के लिए उत्सुक हूं।








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Tuesday, June 16

ब्लॉगर डैशबोर्ड पर विज्ञापन देख चौंकिएगा नहीं!!!

आज जैसे ही अपने एक ब्लॉग पर पोस्ट पब्लिश की तो प्रकाशन की सूचना के साथ ही गूगल की ओर से दिए गए विज्ञापन के दर्शन हुए। यह परिवर्तन देख कर चौंकना लाजिमी था, क्योंकि मैं पिछले करीब पांच साल से ब्लॉगर के संपर्क में हूं और यह पहला मौका है, जब ब्लॉगर ने इस तरह से प्रयोक्ता की आजादी में खलल डाला है।



खैर इसका ब्लॉगर को अधिकार है, क्योंकि वह इतने प्रयोक्ताओं को मुफ्त सुविधा मुहैया करा रहा है और ऐसे में अगर वह अपने आर्थिक लाभ के लिए विज्ञापन दिखा रहा है तो इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।। गौरतलब है कि 2003 में गूगल ने ब्लॉगर को अधिगृहीत कर लिया था।

चिंता का विषय यह है कि अगर विज्ञापन डैशबोर्ड तक ही सीमित रहे, तो कोई बात नहीं, क्योंकि ये केवल प्रयोक्ता को ही दिखेंगे। लेकिन अगर ये विज्ञापन ब्लॉग की साइडबार में दिखाए जाने लगे तो ये सभी लोगों को अखरने लगेंगे। इस चिंता का आधार यह है कि हाल ही गूगल ने अपनी अधिगृहीत की गई एक अन्य वेबसाइट ऑरकुट पर भी विज्ञापन दिखाना शुरू कर दिया है। वहां विज्ञापन सभी लोगों को दिखाए जाते हैं औऱ उसका आर्थिक फायदा केवल गूगल को होता है।

चिट्ठा लेखक अपने ब्लॉग पर बहुत मेहनत करता है और इसी वजह से उसे पढ़ने के लिए पाठक आते हैं। इस बात में भी दोराय नहीं कि चिट्ठा लेखक चाहता है कि उसकी मेहनत का फायदा उसे ही मिले। इस विज्ञापन के दिखाई देने के बाद मेरे मन में अपने डोमेन नेम और अपने ही स्पेस पर जाने का विचार हावी हो रहा है और फुरसत मिलते ही मैं ऐसा करने का मन बना रहा हूं।

अगर आप भी अपने चिट्ठे को लेकर गंभीर है और अपने हित में इसका विस्तार करना चाहते हैं तो मेरी यही सलाह है कि कम से कम अपना डोमेन नेम रजिस्टर करा कर उस पर शिफ्ट हो जाना चाहिए, जिस तरह पिछले दिनों ताऊजी ने अपने ब्लॉग rampuriapc.blogspot.com को taau.taau.in पर शिफ्ट किया है। इस बारे में अगर आपको विस्तार से जानकारी चाहिए तो टिप्पणी के जरिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं।







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Saturday, June 13

आपके ब्लॉगर प्रोफाइल पर इतना सब क्यों दिखता है ?

नीतिश राज जी ने पिछली पोस्ट पर टिप्पणी के जरिए यह सवाल पूछा है- "मेरे प्रोफाइल पर यदि कोई क्लिक करता है तो जितने भी मेरे ब्लॉग हैं, वो आ जाते हैं। मैं उन ब्लॉग लिस्ट में फेरबदल चाहता हूं क्या कोई उपाय है? मैं चाहता हूं जो सबसे नीचे वाला ब्लॉग है, वो सबसे ऊपर आए क्योंकि मैं अधिकतर उस ब्लॉग पर ही एक्टिव रहता हूं। क्या ये संभव है?"

यह सवाल सुनकर मुझे उन दर्जनों हिन्दी ब्लॉगर साथियों के प्रोफाइल का ख्याल आया, जिनकी टिप्पणी पढ़कर मैंने उन्हें खोला और उनकी लम्बी-चौड़ी चिट्ठों की फेहरिस्त में मैं उनके असली ब्लॉग तक पहुंच ही नहीं पाया। इसलिए सभी साथियों को चाहिए कि वे अपने ब्लॉगर प्रोफाइल को इस तरह से तैयार करें, ताकि पाठक न केवल उनके सबसे सक्रिय ब्लॉग तक आसानी से पहुंच सकें, बल्कि इच्छानुसार संपर्क सूत्र भी वहां मौजूद हो।

सबसे पहले नीतिश राज जी के सवाल का जवाब। ब्लॉग लिस्ट से ब्लॉग्स के क्रम को ऊपर-नीचे किया जाना तो संभव नहीं है, लेकिन आप अपने असक्रिय ब्लॉग्स को छिपा जरूर सकते हैं। यानी आप अपने प्रोफाइल में केवल वे ब्लॉग ही दिखाइए, जिन पर आप पूरी तरह सक्रिय रहते हैं। अन्य को ब्लॉगर प्रोफाइल पर स्थान मत दीजिए। इसका तरीका नीचे दिया गया है।

आइए अब जानते हैं ब्लॉगर प्रोफाइल के मैनेजमेंट से जुड़े कुछ सामान्य सवाल-

सवाल- 1 मैंने कई ब्लॉग्स बना रखे हैं, लेकिन मैं सब पर सक्रिय नहीं हूं। मैं नहीं चाहता/चाहती कि उन्हें डिलीट करूं, क्योंकि वे भविष्य में काम आ सकते हैं। लेकिन साथ ही मुझे उन्हें प्रोफाइल पर भी दिखाना पसंद नहीं। मैं क्या करूं।

जवाब- इसके लिए आप प्रोफाइल से अनचाहे ब्लॉग आसानी से हटा सकते हैं। तरीका जानने के लिए इस पोस्ट पर क्लिक करें- प्रोफाइल से अनचाहे ब्लॉग हटाइए



सवाल-2 मैं चाहता/चाहती हूं (या नहीं चाहता/चाहती हूं) कि अपने प्रोफाइल में अपने ई-मेल पते को दिखाऊं। मैं क्या करूं।

जवाब- इस पोस्ट में दिखाए गए तरीके से एडिट प्रोफाइल का पेज खोलें। यहां आपको Show my email address का विकल्प मिलेगा। अगर आप इस पर टिक कर पेज को सेव करते हैं तो आपका ई-मेल पता प्रोफाइल पेज पर दिखने लगता है। टिक नहीं होने की अवस्था में यह नहीं दिखता।



सवाल-3 मैं अपने प्रोफाइल पर फोटो के नीचे ही अपने सबसे प्रमुख ब्लॉग की जानकारी देना चाहता/चाहती हूं। कैसे दूं?

जवाब- इस पोस्ट में दिखाए गए तरीके से एडिट प्रोफाइल का पेज खोलें। यहां आपको Homepage URL विकल्प मिलेगा। इसमें आप अपने ब्लॉग का पता भर दीजिए। यह आपको प्रोफाइल पेज पर नजर आने लगेगा। इसका फायदा यह है कि प्रोफाइल पर जाते ही पाठक को सूचना मिल जाती है कि आपका सबसे प्रमुख ब्लॉग यह है।



सवाल-4 मैं उन चिट्ठों की सूची नहीं दिखाना चाहता/चाहती जिन्हें मैंने फॉलो किया है। मैं क्या करूं।

जवाब- इस पोस्ट में दिखाए गए तरीके से एडिट प्रोफाइल का पेज खोलें। यहां आपको Show sites I follow विकल्प मिलेगा। अगर इस पर टिक लगा है तो इसका मतलब है कि आपके प्रोफाइल पर फॉलो की जाने वाली साइट्स की सूची है। अगर आप इसे हटाना चाहते हैं तो इस टिक को हटाकर पेज को सेव कर दीजिए।



इसके अलावा अगर आप एडिट प्रोफाइल पेज पर मौजूद सुविधाओं को देखेंगे तो आप प्रोफाइल पेज से साथ मनपसंद संगीत जोड़ने, अपने डिस्प्ले नाम को बदलने आदि के भी तरीके सीख जाएंगे। जब आप अपने ब्लॉग पर इतनी मेहनत कर रहे हैं तो ब्लॉगर प्रोफाइल की एडिटिंग में भी कुछ वक्त दीजिए। आखिर यह भी आपके ब्लॉग पर विजिटर्स की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।






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Tuesday, June 9

अभिव्यक्ति का 'आकर्षक फ़ीड विजेट' जारी

हिंदी में हर सप्ताह प्रकाशित होने वाली प्रमुख जाल-पत्रिका अभिव्यक्ति को अब ब्लॉगर साथी अपने ब्लॉग पर सीधे ही पढ़ पाएंगे। कहानी, उपन्यास, संस्मरण, बालजगत, घर परिवार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चित्रकला, प्रकृति, पर्यटन, रसोई आदि 30 से अधिक साहित्यिक विषयों को समेटने वाली इस ख़ास पत्रिका ने अब एक फ़ीड विजेट जारी किया है, जो ब्लॉग या वेबसाइट की साइडबार में आसानी से लगाया जा सकता है।

हर्ष का विषय यह है कि हाल ही इस विजेट को तैयार करने की जिम्मेदारी पत्रिका संपादक पूर्णिमा वर्मन जी ने मुझे सौंपी थी। उनके सुझाव और सहयोग के बाद यह विजेट इस रूप में सामने आया है। यह विजेट दो तरह के पीले रंग में उपलब्ध है।

गहरा पीला
हल्का पीला


ब्लॉग या वेबसाइट संचालक इसे अपने ब्लॉग की टेम्पलेट के हिसाब से चुन सकते हैं। विजेट की विशेषता यह है कि इसमें हर रचना की हैडलाइन पर क्लिक कर उसका सारांश विजेट में ही पढ़ा जा सकता है। इसके बाद संबंधित रचना के वेबपेज तक पहुंचने का विकल्प है। हर सोमवार अभिव्यक्ति का नया अंक प्रकाशित होते ही यह विजेट स्वंय ही अपडेट हो जाएगा।

इसे अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर स्थापित करना बहुत आसान है। ब्लॉगर सेवा वाले ब्लॉग तो इसे एक क्लिक पर लगा सकते हैं।

अभिव्यक्ति विजेट को अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर जगह देने के लिए यहां क्लिक करें







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Monday, June 8

क्यों सहें कमेंट बॉक्स के नखरे?

ब्लॉगर सेवा वाले कुछ ब्लॉग्स पर इम्बेडेड कमेंट बॉक्स लगा दिखाई देता है। वही बक्सा, जिससे पोस्ट के ठीक नीचे ही कमेंट करने की सुविधा मिलती है और टिप्पणी करने के लिए एक और पेज नहीं खोलना पड़ता। हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर भी आपको यही कमेंट बक्सा दिख रहा होगा। ब्लॉगर ने जब से इसे जारी किया है, तभी से इसे लेकर खूब शिकायतें मिल रही हैं। शिकायत यह है कि कमेंट को पब्लिश करने में यह खूब नखरे दिखाता है। अक्सर कहता है कि आपका कमेंट पब्लिश नहीं हो सका। कई बार तो 2-3 प्रयास के बाद भी कमेटं पब्लिश नहीं होता। ऐसे में पाठक खीझ के साथ बिना कमेंट किए ही वहां से चला जाता है।

इस स्थिति में कई साथी कमेंट के लिए पुराना विकल्प लागू करना बेहतर समझते हैं। लेकिन इससे पाठक को यह असुविधा होती है कि कमेंट के लिए पाठक दूसरे पेज पर जाने के लिए मजबूर होता है।

क्या ऐसा नहीं हो सकता कि इम्बेडेड कमेंट (पोस्ट के नीचे ही कमेंट बक्सा) सुविधा का लाभ भी मिल जाए और इसके नखरे दिखाने की स्थित में पाठक को कमेंट के परंपरागत पेज पर भेजने की भी व्यवस्था हो।

ऐसा बिल्कुल हो सकता है और हिन्दी ब्लॉग टिप्स ने तो इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए हैं। प्रबंध यह है कि कमेंट बॉक्स के ठीक ऊपर एक विकल्प दिया गया है, जिस पर क्लिक करते ही पाठक परंपरागत कमेंट पेज (पॉप अप) पर पहुंच जाता है और वहां से अपना कमेंट दे सकता है। यह आपको कमेंट बक्से के ठीक ऊपर टिप्पणी प्रकाशन में कोई परेशानी है तो यहां क्लिक करें.. के रूप में दिखेगा।

क्या आप भी अपने ब्लॉग में यह अतिरिक्त विकल्प लागू करना चाहते हैं?

अगर हां, तो नीचे दी गई सैटिंग्स बदलिए। इस सैटिंग को तभी बदलिए, जब आपने कमेंट के लिए इम्बेडेड बॉक्स का विकल्प अपनाया हो। अगर आप इम्बेडेड बॉक्स चाहते हैं तो इस पोस्ट की मदद लीजिए।

1. डैशबोर्ड पर जाकर संबंधित ब्लॉग के लेआउट पर क्लिक करें।

2. Edit HTML पर क्लिक करें। (एचटीएमएल कोड में परिवर्तन करने से पहले अपनी टेम्पलेट का बैकअप जरूर रखें। इससे आप अपनी मूल टेम्पलेट फिर से पा सकते हैं। टेम्पलेट को डाउनलोड करने का तरीका यहां दिया गया है।)

3. Expand Widget Templates को टिक कर दें।



4. एचटीएमएल कोड में यह खास हिस्सा ढूंढ़ें। इसे ढूंढ़ने के लिए आप CONT+F कुंजियों की मदद भी ले सकते हैं-

<p><data:blogCommentMessage/></p>


5. इसके ठीक नीचे यह खास कोड पेस्ट कर दें। याद रखे इस कोड में एक खास 19 अंकों की संख्या का इस्तेमाल हुआ है। यह दरअसल ब्लॉगआईडी है और इस कोड को लगाने से पहले आपको यह कोड बदलना जरूरी है। यह कोड आपको ब्लॉग का डैशबोर्ड खोलते समय एड्रेस बार में दिखता है। कुछ इस तरह-



अपने ब्लॉग का आईडी आपको इस कोड में बदलना है(ब्लॉग आईडी लाल रंग से दिखाया गया है)-

<a expr:href='&quot;http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5897080325661975090&amp;amp;postID=&quot; + data:post.id + &quot;&amp;isPopup=true&quot;' onclick='javascript:window.open(this.href, &quot;bloggerPopup&quot;, &quot;toolbar=0,location=0,statusbar=1,menubar=0,scrollbars=yes,width=400,height=450&quot;); return false;' rel='nofollow'><b>टिप्पणी प्रकाशन में कोई परेशानी है तो यहां क्लिक करें.. </b></a>


इस कोड को पेस्ट करने की विधि इस चित्र में भी दिखाई गई है-



6. परिवर्तन को सेव कर दें।



अब आपने अपने कमेंट बक्से के ऊपर यह संदेश दिखाने और इसकी मदद से पाठक को कमेंट के परंपरागत पेज पर पहुंचाने का फीचर जोड़ लिया है।

किसी भी परेशानी की स्थिति में टिप्पणी के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।

इस तरीके पर पोस्ट लिखने का सुझाव सीमा जी सहित कई साथियों ने काफी समय पहले दिया था, लेकिन समयाभाव के कारण मैं इस पर पोस्ट नहीं लिख सका। अब अभिषेक मिश्रा जी के सुझाव पर यह पोस्ट लिखी गई है। सभी साथियों का आभार..





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