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Showing posts from June, 2009

बधाई दीजिए, हिन्दी ब्लॉग टिप्स आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इतरा रहा है..

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कॉपीस्केप वेबसाइट से पता लगाइए कि आपके ब्लॉग से चुराई गई सामग्री इंटरनेट पर कहां-कहां मौजूद है.. कौन कहता है कि ऑस्ट्रेलिया में हम हिंदुस्तानियों के खिलाफ़ नस्लभेद हो रहा है? हिन्दी ब्लॉग टिप्स को तो वहां ऐसा दर्जा दिया जा रहा है, जैसा कभी हिंदुस्तान में भी नहीं मिला। वहां के एक विश्वविद्यालय ने हिन्दी ब्लॉग टिप्स को अपनी ई-लर्निंग स्टाफ लिस्ट में शुमार बताया है। यहां इस ब्लॉग का केवल नाम ही नहीं है, बल्कि पूरा का पूरा ब्लॉग फ्रेम के रूप में मौजूद है। यह यूनिवर्सिटी है- आस्ट्रेलियन कैथोलिक यूनिवर्सिटी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वहां की बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है और सरकारी अनुदान पर चलती है। देखिए इसकी वेबसाइट पर हिन्दी ब्लॉग टिप्स कहां और कैसे मौजूद है



अब यह मत पूछिए कि यह ब्लॉग वहां तक कैसे पहुंचा और पूरा का पूरा फ्रेम वहां कैसे दिखने लगा। इस सवाल को पूछने से आपको इसलिए रोक रहा हूं कि इसका जवाब तो मुझे भी नहीं पता। खैर हमें तो आम खाने से मतलब, पेड़ क्यों गिने। आप बधाई दे ही दो।

इतने से दिल नहीं भरा तो एक खुशख़बर और झेलिए। हिन्दी ब्लॉग टिप्स से आपका यह साथी भले ही एक धेला नहीं कम…

बेनामी टिप्पणीकारों, तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता

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यह पोस्ट खास तौर पर उन बहादुर और क्रांतिकारी साथियों के लिए लिखी गई है, जो आत्म तुष्टि के लिए खुद के और दूसरों के चिट्ठों पर अनाम टिप्पणियां छोड़ रहे हैं, ठहरे हुए पानी में कंकड़ उछाल रहे हैं और शांत समझे जाने वाले हिन्दी ब्लॉग जगत में नया बवाल लाने की सफल कोशिश कर रहे हैं। मैं ऐसे साथियों के जज़्बे को सलाम करता हूं कि वे अपना अमूल्य समय और योगदान देकर ब्लॉगीवुड में खलनायक का किरदार निभा रहे हैं और मेरे जैसे तुच्छ चिट्ठाकारों को पोस्ट लिखने की एक महत्वपूर्ण वजह दे रहे हैं।

आज रचना जी की यह पोस्ट पढ़ी। वहां बिना मोडरेशन लगाए अनाम टिप्पणियों को ब्लॉग पर सरेआम दिखने की छूट देने वाले साथियों को बताया गया है कि वे किस तरह आसानी से अनचाहे टिप्पणीकार का आईपी पता नोट कर उसे बंद करा सकते हैं। रचना जी की जानकारी ज्ञानवर्द्धक है, लेकिन मुझे यह कुछ अधूरी सी महसूस हुई। इसी वजह से इसे आगे बढ़ाने की इजाज़त मैं रचना जी से चाह रहा हूं।

आगे बढ़ें, उससे पहले मैं अनाम रहकर टिप्पणी करने वाले साथियों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं। पहली बात तो यह कि, उनका आईपी एड्रेस पता कर पाना थ…

अपने डोमेन पर शिफ़्ट होने के फ़ायदे और नुकसान

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पिछली पोस्ट में ब्लॉगर डैशबोर्ड पर गूगल विज्ञापनों की दखलंदाज़ी और अपने डोमेन पर शिफ़्ट होने के विकल्प की बात कही गई थी। इसके जवाब में टिप्पणियों और ई-मेल के रूप में सौ से ज़्यादा साथियों के संदेश प्राप्त हुए और ज़्यादातर ने अपने ब्लॉग को अपने डोमेन पर शिफ़्ट होने में रूचि दिखाई। कुछ साथियों ने यह भी सुझाव दिया कि ब्लॉग को अपने डोमेन पर शिफ़्ट करने में ज़्यादा समझदारी नहीं है, क्योंकि यहां सालाना पैसा देना पड़ता है, जबकि ब्लॉगर पर सबकुछ मुफ्त में उपलब्ध है।

सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए मैंने यह पता लगाने की कोशिश की कि ब्लॉग को अपने डोमेन पर शिफ्ट करने के क्या फ़ायदे और नुकसान है। आप इन्हें गंभीरता से पढ़ें और उसके बाद तय करें कि आप ब्लॉग को अपने डोमेन पर ले जाना पसंद करेंगे, या जो चल रहा है उसे वैसे ही चलने देंगे।

अपना डोमेन क्यों लें?

1. आपके ब्लॉग की छवि सुधरती है और उसके साथ लगे blogspot शब्द से छुटकारा मिल जाता है। जैसे- http://MYSITE.blogspot.com आपकी मर्ज़ी के मुताबिक़ http://MYSITE.com में बदल जाता है। इसके ब्लॉग का यूआरएल आकर्षक भी बन जाता है और प्रोफ़ेशनल भी लगने लगता है। …

ब्लॉगर डैशबोर्ड पर विज्ञापन देख चौंकिएगा नहीं!!!

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आज जैसे ही अपने एक ब्लॉग पर पोस्ट पब्लिश की तो प्रकाशन की सूचना के साथ ही गूगल की ओर से दिए गए विज्ञापन के दर्शन हुए। यह परिवर्तन देख कर चौंकना लाजिमी था, क्योंकि मैं पिछले करीब पांच साल से ब्लॉगर के संपर्क में हूं और यह पहला मौका है, जब ब्लॉगर ने इस तरह से प्रयोक्ता की आजादी में खलल डाला है।



खैर इसका ब्लॉगर को अधिकार है, क्योंकि वह इतने प्रयोक्ताओं को मुफ्त सुविधा मुहैया करा रहा है और ऐसे में अगर वह अपने आर्थिक लाभ के लिए विज्ञापन दिखा रहा है तो इसे गलत नहीं ठहराया जा सकता।। गौरतलब है कि 2003 में गूगल ने ब्लॉगर को अधिगृहीत कर लिया था।

चिंता का विषय यह है कि अगर विज्ञापन डैशबोर्ड तक ही सीमित रहे, तो कोई बात नहीं, क्योंकि ये केवल प्रयोक्ता को ही दिखेंगे। लेकिन अगर ये विज्ञापन ब्लॉग की साइडबार में दिखाए जाने लगे तो ये सभी लोगों को अखरने लगेंगे। इस चिंता का आधार यह है कि हाल ही गूगल ने अपनी अधिगृहीत की गई एक अन्य वेबसाइट ऑरकुट पर भी विज्ञापन दिखाना शुरू कर दिया है। वहां विज्ञापन सभी लोगों को दिखाए जाते हैं औऱ उसका आर्थिक फायदा केवल गूगल को होता है।

चिट्ठा लेखक अपने ब्लॉग पर बहुत मेहनत करता…

आपके ब्लॉगर प्रोफाइल पर इतना सब क्यों दिखता है ?

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नीतिश राज जी ने पिछली पोस्ट पर टिप्पणी के जरिए यह सवाल पूछा है- "मेरे प्रोफाइल पर यदि कोई क्लिक करता है तो जितने भी मेरे ब्लॉग हैं, वो आ जाते हैं। मैं उन ब्लॉग लिस्ट में फेरबदल चाहता हूं क्या कोई उपाय है? मैं चाहता हूं जो सबसे नीचे वाला ब्लॉग है, वो सबसे ऊपर आए क्योंकि मैं अधिकतर उस ब्लॉग पर ही एक्टिव रहता हूं। क्या ये संभव है?"

यह सवाल सुनकर मुझे उन दर्जनों हिन्दी ब्लॉगर साथियों के प्रोफाइल का ख्याल आया, जिनकी टिप्पणी पढ़कर मैंने उन्हें खोला और उनकी लम्बी-चौड़ी चिट्ठों की फेहरिस्त में मैं उनके असली ब्लॉग तक पहुंच ही नहीं पाया। इसलिए सभी साथियों को चाहिए कि वे अपने ब्लॉगर प्रोफाइल को इस तरह से तैयार करें, ताकि पाठक न केवल उनके सबसे सक्रिय ब्लॉग तक आसानी से पहुंच सकें, बल्कि इच्छानुसार संपर्क सूत्र भी वहां मौजूद हो।

सबसे पहले नीतिश राज जी के सवाल का जवाब। ब्लॉग लिस्ट से ब्लॉग्स के क्रम को ऊपर-नीचे किया जाना तो संभव नहीं है, लेकिन आप अपने असक्रिय ब्लॉग्स को छिपा जरूर सकते हैं। यानी आप अपने प्रोफाइल में केवल वे ब्लॉग ही दिखाइए, जिन पर आप पूरी तरह सक्रिय रहते हैं। अन्य को ब्लॉगर …

अभिव्यक्ति का 'आकर्षक फ़ीड विजेट' जारी

हिन्दी ब्लॉग टिप्स द्वारा तैयार अभिव्यक्ति विजेट को अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर जगह देने के लिए यहां क्लिक करें हिंदी में हर सप्ताह प्रकाशित होने वाली प्रमुख जाल-पत्रिका अभिव्यक्ति को अब ब्लॉगर साथी अपने ब्लॉग पर सीधे ही पढ़ पाएंगे। कहानी, उपन्यास, संस्मरण, बालजगत, घर परिवार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चित्रकला, प्रकृति, पर्यटन, रसोई आदि 30 से अधिक साहित्यिक विषयों को समेटने वाली इस ख़ास पत्रिका ने अब एक फ़ीड विजेट जारी किया है, जो ब्लॉग या वेबसाइट की साइडबार में आसानी से लगाया जा सकता है।

हर्ष का विषय यह है कि हाल ही इस विजेट को तैयार करने की जिम्मेदारी पत्रिका संपादक पूर्णिमा वर्मन जी ने मुझे सौंपी थी। उनके सुझाव और सहयोग के बाद यह विजेट इस रूप में सामने आया है। यह विजेट दो तरह के पीले रंग में उपलब्ध है।

गहरा पीलाहल्का पीला

ब्लॉग या वेबसाइट संचालक इसे अपने ब्लॉग की टेम्पलेट के हिसाब से चुन सकते हैं। विजेट की विशेषता यह है कि इसमें हर रचना की हैडलाइन पर क्लिक कर उसका सारांश विजेट में ही पढ़ा जा सकता है। इसके बाद संबंधित रचना के वेबपेज तक पहुंचने का विकल्प है। हर सोमवार अभिव्यक्ति का नया अंक प…

क्यों सहें कमेंट बॉक्स के नखरे?

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ब्लॉगर सेवा वाले कुछ ब्लॉग्स पर इम्बेडेड कमेंट बॉक्स लगा दिखाई देता है। वही बक्सा, जिससे पोस्ट के ठीक नीचे ही कमेंट करने की सुविधा मिलती है और टिप्पणी करने के लिए एक और पेज नहीं खोलना पड़ता। हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर भी आपको यही कमेंट बक्सा दिख रहा होगा। ब्लॉगर ने जब से इसे जारी किया है, तभी से इसे लेकर खूब शिकायतें मिल रही हैं। शिकायत यह है कि कमेंट को पब्लिश करने में यह खूब नखरे दिखाता है। अक्सर कहता है कि आपका कमेंट पब्लिश नहीं हो सका। कई बार तो 2-3 प्रयास के बाद भी कमेटं पब्लिश नहीं होता। ऐसे में पाठक खीझ के साथ बिना कमेंट किए ही वहां से चला जाता है।

इस स्थिति में कई साथी कमेंट के लिए पुराना विकल्प लागू करना बेहतर समझते हैं। लेकिन इससे पाठक को यह असुविधा होती है कि कमेंट के लिए पाठक दूसरे पेज पर जाने के लिए मजबूर होता है।

क्या ऐसा नहीं हो सकता कि इम्बेडेड कमेंट (पोस्ट के नीचे ही कमेंट बक्सा) सुविधा का लाभ भी मिल जाए और इसके नखरे दिखाने की स्थित में पाठक को कमेंट के परंपरागत पेज पर भेजने की भी व्यवस्था हो।

ऐसा बिल्कुल हो सकता है और हिन्दी ब्लॉग टिप्स ने तो इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए हैं। …

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